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पहले चरण में यह परियोजना राज्य के आदिवासी बहुल जिलों में लागू की गई। ये जिले हैं- पश्चिमी मध्यप्रदेश के झाबुआ, बड़वानी तथा धार और पूर्वी मध्यप्रदेश के अनूपपुर, डिण्डोरी, मण्डला तथा शहडोल और उत्तर में श्योपुर। इन जिलों में 815 गाँवों का चयन किया गया। औसतन प्रत्येक दस गाँवों की इकाई को समूह के बतौर लिया गया। प्रत्येक जिले में सौ गाँवों से अधिक में परियोजना का क्रियान्वयन किया गया। पहला चरण जून 2007 को समाप्त हो गया। दूसरे चरण की शुरूआत एक जुलाई 2007 से हो चुकी है। इसी बीच ज्ञाबुआ जिले से अलग होकर आलीराजपुर जिला बना हैं। इस प्रकार परियोजना अब नौ जिलों संचालित हैं। परियोजना का विस्तार इन्हीं जिलों के करीब तीन हजार गांवों में हुआ है। इन गांवों में पहले चरण के 815 गांव भी शामिल हैं।

आलीराजपुर

वर्तमान गठित आलीराजपुर जिला झाबुआ जिले से अलग होकर बना है। जिले की जनसंख्या लगभग सात लाख है। जिले का क्षेत्रफल 268958 हेक्टेयर है। जिले की सीमाएँ गुजरात और महाराष्ट्र को छूती हैं। आलीराजपुर में तीन तहसीलें हैं - आलीराजपुर जोबट और भाभरा। विकास खण्डों की संख्या छह है - आजीराजपुर, जोबट, उदयगढ़, भाभरा, सोंडवा और कटठीवाड़ा। कुल 551 गाँवों वाले इस नवगठित जिले में 93 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति की है। भील - भिलाला और पटल्या जनजाति की बहुलता है। कुल एक लाख 45 हजार 743 लोग साक्षर हैं।

रेल मार्ग की सुविधा नहीं है। सड़क मार्ग से गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़ा है। आठ फरवरी 2008 को बडोदरा-धार ब्राडगेज रेल लाइन का शिलान्यास हुआ।

आलीराजपुर की कृषि उपज मंडी प्रदेश में देशी आम की सबसे बड़ी मंडी मानी जाती है । मंडी समिति को आम के मौसम में भारी राजस्व मिलता है। गुजरात और महाराष्ट्र से आम के व्यापारी यहाँ आते हैं।

आलीराजपुर का अपना विशिष्ठ इतिहास है। आलीराजपुर एक स्वतंत्र रियासत थी जिसकी स्थापना जोधपुर के राठौड़वंशी राजा आनंद देव ने 1437 में वर्तमान आलीराजपुर से 10 किमी दूर आनन्दवाली का निर्माण कर राजधानी बनाया था। बाद में इसे आली के नाम से जाना गया। वर्तमान आलीराजपुर जो पूर्व में राजपुर के नाम से भी जाना जाता था। इसकी स्थापना राजसिंह ने की थी। अंतिम शासक राजा प्रताप सिंह ने आलीराजपुर नगर में नगर पालिका का गठन 1909-10 में किया।

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