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MPRLP सामाजिक सुरक्षा

1. वर्ग 1 - महिला

1.1 समाज के कमज़ोर वर्ग की लड़कियाँ।

1.2 घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएँ

1.3 निराश्रित/निर्धन परिवार की कन्या/विधवा/परित्यक्ता

1.4 श्रम संबंधी कार्य जैसे भवन निर्माण, सड़क निर्माण आदि क्षेत्र में कार्यरत मज़दूर गर्भवती महिलाएँ।

1.5 अनुसूचित जाति की विवाह योग्य कन्या, परित्यक्ता एवं विधवा महिला

1.6 गरीब गर्भवती महिलाएँ

1.7 कठिन परिस्थिति में जीवन यापन कर रही महिलाएँ।

2. वर्ग 2 - वृध्द

2.1. 50 वर्ष या अधिक आयु की विधवा/परित्यक्ता महिला व 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के असहाय वृध्द

2.2 समाज के 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के गरीबी रेखा से नीचे के परिवार के असहाय वृध्द

3. वर्ग 3 - बीमार/लाचार

3.1 गरीब व्यक्ति तथा उसका परिवार जो असाध्य बीमारी से पीड़ित हैं

3.2 घातक व जानलेवा बीमारियों से पीड़ित गरीबी रेखा की सूची के अंतर्गत आने वाले परिवार

4. वर्ग 4 - शारीरिक रूप से नि:शक्त /विकलांग

4.1 समाज के असहाय शारीरिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति जिनका कोई सहारा नहीं है

4.2 शारीरिक रूप से नि:शक्त बच्चे

4.3 6 से 21 वर्ष आयु के ऐसे विकलांग जो पढ़ाई में तेज हैं, किंतु आर्थिक संसाधनों के अभाव में अपनी पढ़ाई जारी रखने में असमर्थ हैं हो

4.4 समाज के शारीरिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति, जो बगैर बाह्य उपकरणों के अपने दैनिक कार्यों को करने में अक्षम हो।

4.5 सभी उम्र व सभी वर्ग के नि:शक्त जिन्हें अपनी नि: शक्तता की पहचान बतानी पड़ती है

4.6 दृष्टि व श्रवण बाधित बच्चे, छात्र जो सामान्य विद्यालयों में अपनी पढ़ाई नहीं कर सकते।

4.7 दृष्टिहीन बच्चे/छात्र

4.8 श्रवण बाधित बच्चे

4.9 अस्थि बाधित शारीरिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति/छात्र

4.10 शारीरिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति जो अपने प्रयासों से आजीविका कमाने में असमर्थ है।

4.11 मानसिक रूप से अविकसित बच्चे, जो समाज के अन्य सामान्य बच्चों के साथ तारतम्य नहीं बना पाते

5. वर्ग 5 - सामाजिक रूप से नि:शक्त

5.1 जरूरतमंद अनुसूचित जाति/आदिवासी परिवार जो अपनी निर्धनता एवं असहाय अवस्था के कारण संकटापन्न स्थिति में हैं

5.2 अनुसूचित जाति/जनजाति के बेरोजगार युवक

6. वर्ग 6 - अत्यधिक गरीब/बेसहारा

6.1 कुपोषण के शिकार बच्चे

6.2 अनाथ बच्चे

6.3 समाज में सबसे गरीब तबका जिसकी खाद्यान्न सुरक्षा भी किसी सहयोग के बगैर नहीं हो पा रही हो।

6.4 समाज में सबसे गरीब तबके के परिवार जिसमें कमाई करने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो गई हो

6.5 भूमिहीन परिवार जो ग्रामीण क्षेत्र में खेत मज़दूर के रूप में अपना जीवन यापन करता है

6.6 ग्रामीण भूमिहीन परिवार के व्यक्ति जो रोज कमा कर रोज खाते हैं जिनकी भविष्य के लिए कोई सुरक्षा नहीं है।

वर्ग 1 - महिला

इस वर्ग में समाज के उस हिस्से को लिया गया है जो आबादी में तो पूरी दुनिया की आधी है किंतु संसाधनों व सुविधाओं के लिहाज़ से उनका हिस्सा काफी कम बैठता है। सामाजिक सुरक्षा के हिसाब से भी सबसे ज्यादा सुरक्षा की आवश्यकता महिलाओं को ही रहती है क्योंकि उनकी निर्भरता काफी हद तक हमारे पितृसत्तात्मक समाज में पुरुषों पर है। पुरुष विहीन घर में महिला असहाय मानी जाती है चाहे वह ग्रामीण परिवेश हो या शहर की चकाचौंध में पली बढ़ी, अमीर परिवार से हो या गरीब। हमने सामाजिक सुरक्षा के दायरे में ग्रामीण परिवेश की महिलाओं को ध्यान में रखकर शासन की योजनाओं को समझने की कोशिश की है। सरकार के विभिन्न विभागों में इस वर्ग के लिए जो भी योजनाएँ है उससे निम्न वर्ग के महिलाओं को लाभ दिलाया जा सकता है।

1.1 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

समाज के कमज़ोर वर्ग की लड़कियाँ।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

लाड़ली लक्ष्मी योजना

योजना का संक्षिप्त विवरण

राज्य सरकार द्वारा समाज में लैंगिक अनुपात को बेहतर करने व कन्या जन्म के बारे में समाज का दृष्टिकोण सकारात्मक बनाने के लिए यह योजना प्रारंभ की है। इसमें कन्या जन्म को प्रोत्साहित करने के लिये लाई गई इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में बालिकाओं के शैक्षणिक तथा स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार लाना है। बालिकाओं के अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने, बालिका भ्रूण हत्या रोकने और बालिकाओं के जन्म के प्रति जनता में सकारात्मक सोच बनाना है। यह योजना एक अप्रैल 2007 से संपूर्ण मध्यप्रदेश में लागू है। इसमें पंजीकृत बालिका के कक्षा 6 में प्रवेश लेने पर रुपये 2000#- कक्षा 9 वीं में प्रवेश लेने पर रुपये 4000#- और कक्षा 11वीं में प्रवेश लेने पर रुपये 7500#- का एक मुश्त भुगतान किया जावेगा। कक्षा 11वीं में प्रवेश लेने के पश्चात्् आगामी 2 वर्ष के लिए रुपये 200#- प्रतिमाह का भुगतान बालिका को किया जावेगा। बालिका की आयु 21 वर्ष की होने पर तथा कक्षा 12वीं की परीक्षा में सम्मिलित होने पर शेष एक मुश्त राशि का भुगतान किया जायेगा। परंतु यह शर्त होगी कि बालिका का विवाह 18 वर्ष की आयु के पश्चात् हो।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

महिला एवं बाल विकास विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

इस योजना के तहत सहायता प्रदान करने के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। जितने भी मामले आयेंगे, उनको सहायता देने का प्रावधान है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

इस योजना के तहत पात्रता के लिए निम्न अर्हताएं हैं। ऐसी बालिकाएँ जिनका जन्म दिनांक 1 जनवरी 2006 को या उसके बाद हुआ हो। प्रदेश के किसी भी ऑंगनवाड़ी केंद्र में पंजीकृत हो। जिनके माता-पिता मध्यप्रदेश के मूल निवासी हो, आयकर दाता न हो और उनकी दो या दो से कम संतान हो तथा जिनके माता-पिता ने योजना में पँजीकरण हेतु आवेदन करने के पूर्व परिवार नियोजन अपना लिया हो या बालिका प्रदेश के किसी अनाथालय अथवा किसी बालिका अनुरक्षण गृह में निवासरत हो।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

इस योजना के तहत जितने भी पात्र हितग्राही होंगे सभी को इसका लाभ देने का प्रावधान है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

योजना में पंजीयन के लिए माता-पिता/अभिभावक द्वारा बालिका के जन्म के एक वर्ष के अंदर संबंधित ऑंगनबाडी कार्यकर्ता को आवेदन-पत्र प्रस्तुत करना होगा। यदि बालिका अपनी माता-पिता की प्रथम संतान है तो द्वितीय संतान के जन्म के एक वर्ष के अंदर आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा। (योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन पत्र का प्रारूप-एक डाउनलोड करें)

1. राष्ट्रीय बचत पत्र क्रय के लिए भरा हुआ एवं हस्ताक्षरित आवेदन (पाँच प्रति) में।

2. पत्र को शासन को पेश करने के लिए हस्ताक्षारित आवेदन (पाँच प्रति) में।

3. आवेदक का मूल निवासी तथा परिवार नियोजन अपनाने के संबंध में कोई दस्तावेज/प्रमाण पत्र

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : ऑंगनवाड़ी, महिला एवं बाल विकास विभाग।


1.2 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएँ।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

ऊषा किरण योजना

योजना का संक्षिप्त विवरण

राज्य सरकार द्वारा समाज के महिलाओं के ऊपर होने वाली हिंसा, शारीरिक, मानसिक भावानात्मक, या आर्थिक व उनके साथ किये जाने वाला व्यवहार जिससे उनकी स्वतंत्रता का हनन हो। इस सबसे संरक्षण हेतु मध्यप्रदेश सरकार ने 29 जून 2008 को ''ऊषा किरण योजना'' का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत घरेलू हिंसा से पीड़ित कोई भी महिला व बच्चा सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

महिला एवं बाल विकास विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

इस योजना के तहत सहायता प्रदान करने के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। जितने भी मामले आएंगे, उनको सहायता देने का प्रावधान है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

इस योजना के तहत समाज के सभी वर्गों की घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएँ पात्र होंगी।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

इस योजना के तहत जितने भी मामले आएंगे सभी पर कार्यवाही की जानी है। केवल मामला घरेलू हिंसा से संबंधित होना चाहिए।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

कोई भी व्यक्ति घरेलू हिंसा की रिर्पोट संरक्षण अधिकारी, सेवा प्रदाता, मजिस्ट्रेट को भी आवेदन देकर कर सकता है। जिसके पश्चात् संरक्षण अधिकारी घरेलू हिंसा की शिकायत मिलने पर प्रारूप -1 में घरेलू हिंसा की रिपोर्ट तैयार करेगा और उसे मजिस्ट्रेट को देगा और प्रतियाँ स्थानीय अधिकारिता की सीमाओं के भीतर जहाँ ऐसी घरेलू हिंसा होना कहा गया है, के पुलिस थाना के भार साधक पुलिस अधिकारी को और उस क्षेत्र के सेवा प्रदाताओं को भेजेगा। इसके अलावा किसी व्यक्ति के अनुरोध पर सेवा प्रदाता प्रारूप 1 में घरेलू हिंसा की रिपोर्ट ले सकता है और उसकी एक प्रति मजिस्ट्रेट , और उस क्षेत्र के संरक्षण अधिकारी को भेजेगा। (इस योजना के अंतर्गत उपयोगी आवश्यक प्रारूप-दो डाउनलोड करें)

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

इस योजना का लाभ लेने के लिए केवल आवेदन देना होता है, अन्य किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं है।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : सेवा प्रदाता, संरक्षण अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग।


1.3 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

निराश्रित/निर्धन परिवार की कन्या/विधवा/परित्यक्ता

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

दीनदयाल अन्त्योदय मिशन (मुख्यमंत्री कन्यादान योजना) के तहत सामूहिक विवाह हेतु आर्थिक सहायता योजना

योजना का संक्षिप्त विवरण

एक अप्रैल 2006 से प्रभावी इस योजना में मध्यप्रदेश शासन द्वारा गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/परित्यक्ता के विवाह हेतु के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इस योजना का विस्तार संपूर्ण मध्यप्रदेश में होगा। इस योजना के तहत प्रति आवेदक के मान से रुपये 5,000#- केवल कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था/स्थापना हेतु तथा इसके अतिरिक्त प्रति आवेदन रुपये 1000#- सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चो की प्रतिपूर्ति के लिए प्रायोजक को राशि उपलब्घ कराई जायेगी।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

पंचायत एवं सामाजिक न्याय विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

नहीं

योजना के तहत पात्र हितग्राही

इस योजना का लाभ लेने के लिए हितग्राही महिला को मध्यप्रदेश का निवासी होना तथा उसके परिवार को मध्यप्रदेश में निवासरत होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त निराश्रित एवं निर्धन परिवार की कन्या/विधवा/परित्यक्ता ने विवाह के लिए निर्धारित आयु 18 वर्ष पूर्ण कर ली हो। योजना का लाभ केवल उन्हीं कन्याओं के विवाहों को मिलेगा जो सामूहिक विवाह आयोजन के अनर््तगत हो।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

आवेदकों को इस योजना का लाभ लेने के लिए ग्राम पंचायत के माध्यम से अपना आवेदन जनपद पंचायत को करना होगा। जिला स्तर पर दीनदयाल अन्त्योदय मिशन की एक कार्यकारिणी समिति होगी जिसके द्वारा आवेदकों में से हितग्राहियों का चयन किया जायेगा। इस समिति में दीनदयाल अन्त्योदय मिशन के तहत पंजीकृत जिले की स्वैच्छिक संस्था, जिले के प्रभारी मंत्री, जिले के समस्त सांसद व विधायक, अध्यक्ष जिला पंचायत, जिला मुख्यालय की नगरीय निकाय के महापौर/अध्यक्ष नगर पालिका, जिले के प्रभारी मंत्री द्वारा नामांकित पाँच सदस्य व कलेक्टर शामिल है। समिति की अध्यक्ष प्रभार मंत्री तथा सचिव कलेक्टर होंगे।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

आवेदन पत्र समिति के सचिव या प्रायोजक को आर्थिक सहायता हेतु प्रस्तुत किये जाएँगे। सचिव सभी आवेदन पत्रों को पंजीकृत करायेंगे। समिति के सचिव आवेदकों की पारिवारिक एवं आर्थिक स्थिति का जाँच प्रतिवेदन संबंधित जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा नगरीय क्षेत्र में कलेक्टर द्वारा प्राधिकृत अधिकारी से प्राप्त करेंगे।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

आयु प्रमाण पत्र

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : ग्राम पंचायत, पंचायत सचिव।

कार्यकारिणी द्वारा निश्चित आवेदकों के सामूहिक विवाह हेतु प्रायोजक को सहायता राशि मिशन के कोष से सचिव द्वारा जारी चेक से आयोजन की तारीख से पन्द्रह दिन पूर्व दी जाएगी।


1.4 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

श्रम संबंधी कार्य जैसे भवन निर्माण, सड़क निर्माण आदि क्षेत्र में कार्यरत मज़दूर गर्भवती महिलाएँ।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

प्रसूति सहायता योजना

योजना का संक्षिप्त विवरण

महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति की स्थिति में प्रसूति पूर्व एवं प्रसूति पश्चात् कुल 12 सप्ताह के लिए प्रसूति हित लाभ करने के लिए यह योजना प्रभावशील है। इस योजना के तहत उन भवन और अन्य निर्माण महिला कर्मकारों को इसका लाभ मिलेगा जो कम से कम एक वर्ष से निधि में अभिदाय दे रही हों तथा अधिनियम के अंतर्गत महिला हितधारी के रूप में पंजीबध्द हो और परिचय पत्र धारी हैं। यह योजना संपूर्ण मध्यप्रदेश में लागू होगी। इस योजना में -

1. हिताधिकारी महिला श्रमिक को गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में कुल 12 सप्ताह की अवधि के लिए उसके द्वारा प्राप्त किये जा रहे वेतन का पचास प्रतिशत भुगतान प्रसूति हितलाभ के रूप में किया जायेगा।

2. प्रसूति के बाद हिताधिकारी को 1000#- रू. प्रसूति हितलाभ के अतिरिक्त प्रसूति चिकित्सा व्यय की प्रति पूर्ति के लिए भुगतान किया जायेगा।

3. प्रसूति दौरान बीमारी या अन्य चिकित्सीय जटिलता के कारण अधिकतम एक माह अथवा जितना समय बीमारी से ठीक होने में लगे (दोनों में जो भी कम हो) की अवधि का प्रसूति हितलाभ भुगतान 12 सप्ताह के अतिरिक्त आधे वेतन के समतुल्य अधिकतम 1000#- रू. प्रतिमाह की दर से दिया जाएगा।

4. प्रसूति के दौरान हिताधिकारी महिला श्रमिक की मृत्यु हो जाने पर उसकी मृत्यु की तिथि तक प्रसूति हितलाभ व प्रसूति चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति का भुगतान उसके उत्तर जीवित परिवार के सदस्यों को निम्नलिखित क्रम में किया जायेगा:-

  • पति को पूर्ण राशि
  • पुत्र/पुत्री एक से अधिक होने पर बराबर भाग में
  • उपरोक्त के जीवित न होने पर वैध उत्तराधिकारी/उत्तराधिकारियों को
  • हिताधिकारी पुरुष श्रमिक को उसके मासिक औसत वेतन की दर से 15 दिन के पितृत्व प्रसूति हितलाभ की पात्रता होगी।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

श्रम विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

स्पष्ट नहीं है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

  • महिला श्रमिक अधिनियम की धारा 13 के अंतर्गत हिताधिकारी परिचय पत्र धारी हो।
  • प्रसव के समय महिला हिताधिकारी की आयु 20 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
  • प्रसूति हितलाभ अधिकतम दो बार के प्रसव के लिए देय होगा।
  • महिला श्रमिक के समय बीमारी या जटिल चिकित्सा की स्थिति में आगे लगातार काम से अनुपस्थित रहने के कारण उसे अधिकतम एक माह तक अतिरिक्त अवधि के लिए प्रसूति हितलाभ सुविधा प्रदान कीजायेगी।
  • ऐसे निर्माण कर्मकार हिताधिकारी जो मंडल की निधि में मासिक अभिदाय जमा करने की चूक करते हैं, उन्हें प्रसूति सहायता योजना के लाभ की पात्रता नहीं होगी ।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

इस योजना के तहत सभी हितधारी जो पात्रता शर्तो को पूरा करते हों लाभ के अधिकारी हैं।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

हिताधिकारी महिला श्रमिक द्वारा प्रपत्र में हितलाभों का स्थानीय श्रम अधिकारी अथवा मंडल में आवेदन भरकर जमा कराया जाएगा। यह आवेदन चिकित्सा द्वारा अनुमानित प्रसूति तिथि से छ: सप्ताह पूर्व जमा करना आवश्यक है किंतु यदि निर्माण श्रमिक कुछ कारणोंवश पूर्व में आवेदन पत्र जमा कर सकती हैं, किंतु प्रसूति दिनांक से अधिकतम 60 दिन के अंदर आवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा अन्यथा प्रसूति हितलाभ की पात्रता नहीं होगी।

स्थानीय श्रम कार्यालयों अथवा मंडल कार्यालय में आवेदन प्राप्त होने पर आवेदन की जाँच सत्यापन कर प्रसूति हितलाभाें के भुगतान के लिए मंडल मुख्यालय को प्रकरण भेजा जाये। मंडल कार्यालय में आवेदन प्राप्त होने पर अपेक्षित जाँच पड़ताल के बाद तीन किश्तों में प्रसूति हितलाभ, चार - चार सप्ताह के लिए तथा दो किश्त में प्रसूति चिकित्सा प्रतिपूर्ति भुगतान स्थानीय श्रम कार्यालय/मंडल के माध्यम से रेखांकित बैंक ड्राफ्ट द्वारा हितग्राही को प्रेषित किया जायेगा।

प्रसूति हितलाभ के संबंध में प्राप्त आवेदनों के भुगतान की स्वीकृति मंडल के अध्यक्ष के अनुमोदन से की जायेगी तथा स्वीकृति के बाद मंडल के सचिव द्वारा नियमानुसार देय भुगतान हितग्राहियों को भेजा जायेगा।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

महिला हितधारी का परिचय पत्र,

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : स्थानीय श्रम कार्यालय।


1.5 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

अनुसूचित जाति की विवाह योग्य कन्या, परित्यक्ता एवं विधवा महिला जिसके विवाह के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं हैं।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

अनुसूचित जाति कन्या विवाह सौभाग्यवती योजना

योजना का संक्षिप्त विवरण

इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की कन्या की विवाह हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। इस योजना में अनुसूचित जाति के ऐसे माता/पिता, अभिभावकों की विवाह योग्य कन्या की शादी के लिए रुपये 5000#- की राशि उपलब्ध कराई जाती है जो गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

वर्ष 2006 -07 के दौरान इस योजना के तहत 7 हजार महिलाओं को लाभ दिया गया था। जिसमें 350 लाख का व्यय आया था। इस वर्ष 298 लाख रुपये का प्रावधान है जिसमें 5960 विवाह योग्य महिलाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

  • कन्या के माता पिता को मध्यप्रदेश का मूल निवासी एवं अनुसूचित जाति का होना आवश्यक है।
  • कन्या की उम्र 18 वर्ष एवं उससे अधिक होना आवश्यक है।
  • एक ही परिवार की अधिकतम दो कन्याओं के विवाह हेतु राशि स्वीकृत करने का प्रावधान है।
  • अनुसूचित जाति की परित्यक्ता एवं विधवा महिला भी योजना का लाभ ले सकती है।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

योजना के हितग्राही का चयन आवेदन के आधार पर किया जाता है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

पात्र कन्या के विवाह हेतु इच्छुक माता पिता/अभिभावक को एक लिखित आवेदन पत्र कलेक्टर अथवा विभाग के संयोजक/सहायक आयुक्त मंडल संयोजक को प्रस्तुत करना होगा साथ ही जाति प्रमाण पत्र गरीबी की रेखा के नीचे सूची में सरपंच द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा। आवेदन पत्र में कन्या विवाह की निश्चित तिथि, वर का नाम, पूर्ण पता एवं व्यवसाय का उल्लेख करना आवश्यक है। कन्या विवाह के लिये स्वीकृत राशि कन्या की शादी की तिथि से कम से कम सात दिवस पूर्व कन्या के अभिभावकों को बैंक ड्राफ्ट के रूप में दी जावेगी।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

  • लिखित आवेदन पत्र, जिसमें कन्या विवाह की निश्चित तिथि, वर का नाम पूर्ण पता एवं व्यवसाय का उल्लेख करना आवश्यक है।
  • जाति प्रमाण पत्र।
  • गरीबी की रेखा से नीचे की सूची में सरपंच द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र ।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : जिला कलेक्टर, जिला संयोजक सहायक आयुक्त, मंडल संयोजक।


1.6 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

गरीब गर्भवती महिलाएँ जो प्रसव के दौरान चिकित्सा सुविधाओं को प्राप्त नहीं कर पाती।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

जननी सुरक्षा योजना

योजना का संक्षिप्त विवरण

यह योजना राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अनर््तगत मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर को कम करने व सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए चलायी जा रही है। इसके तहत हितग्राही महिला को शासकीय अस्पताल में प्रसव कराने पर ग्रामीण क्षेत्र में रुपये 1400#- तथा शहरी क्षेत्र में रुपये 1000#- की नगद राशि दी जाती है। इसके अतिरिक्त महिला को निकट के शासकीय अस्पताल में पहुँचाने के लिए 250 रुपये का परिवहन व्यय भी प्रदान किया जाता है। यह राशि महिला को प्रसव के पश्चात् अस्पताल में तीन दिन भर्ती रहने के बाद दी जाती है। इसमें उसे प्रसव उपरांत पूरी देखभाल तथा उसके बच्चे को भी देखभाल व टीकाकरण की सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। इस योजना में यह भी शामिल है कि माता को अस्पताल तक पहुँचाने वाली प्रेरक महिला उसके बच्चे को जन्म के लगभग डेढ़ माह बाद पहले टीकाकरण के लिए भी लेकर आयेगी। यह प्रेरक शासकीय कर्मचारी को छोड़कर कोई भी महिला हो सकती है। जननी सुरक्षा योजना मध्यप्रदेश के सभी मेडिकल कालेजों, जिला चिकित्सालयों तथा अन्य सभी चिन्हाँकित शासकीय अस्पतालों में जहाँ 24 घंटे प्रसव की सुविधाएँ उपलब्ध हैं, लागू की गई हैं।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

केंद्र सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत वित्त पोषित ।

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

स्वास्थ्य विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

योजना सभी गरीब गर्भवती पात्र हितग्राहियों के लिए है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की सभी गर्भवती महिलाओं को लाभ प्राप्त करने की पात्रता है, जिनकी दो से कम जीवित संतान हैं। दो बच्चे जीवित रहते हुए अगले प्रसव के समय उन्हें इस योजना का लाभ तभी दिया जा सकेगा जबकि हितग्राही प्रसव के उपरांत नसबंदी कराती है।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

इस योजना में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली सभी गर्भवती महिलाओं को सेवा प्रदान की जाती है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

जननी सुरक्षा योजना के तहत लाभ लेने के लिए गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनका गर्भ पंजीयन कराया जाता है। यह कार्य सामान्य तौर पर गाँव में कार्यरत आशा कार्यकर्ता के माध्यम से किया जाता है। आशा कार्यकर्ता के अलावा ऑंगनवाड़ी कार्यकर्ता या सेक्टर मेडिकल ऑफिसर द्वारा चिन्हित कोई भी व्यक्ति कर सकता है। यह जन स्वास्थ्य रक्षक अथवा प्रशिक्षित दाई भी हो सकती है। (इस योजना के अनर््तगत गर्भवती महिलाओं के लाभ लेने के लिए रेफरल पत्र का प्रारूप-तीन डाउनलोड करें)

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

ए.एन.सी. कार्ड , बी.पी.एल.कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, जननी सुरक्षा योजना का रेफरल स्लिप।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : आशा, ऑंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ए.एन.एम./स्वास्थ्य कार्यकर्ता


1.7 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

कठिन परिस्थिति में जीवन यापन कर रही महिलाएँ।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

स्वाधार

योजना का संक्षिप्त विवरण

भारतीय परिवारों से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने सदस्यों को मानसिक व भौतिक संबल प्रदान करें, किंतु कठिन सामाजिक परिस्थिति में फँसी महिला सदस्य को इस प्रकार की सामाजिक सुरक्षा देने में कई बार ये परिवार विफल सिध्द हुए हैं। इन महिलाओं में सभी उम्र की विधवाएँ, निराश्रित व परित्यक्ता महिलाएँ, पूर्व महिला कैदी, खरीद फरोख्त की शिकार महिलाएँ, वेश्यालयों से छुड़ाई गई महिलाएँ, यौन शोषण व अपराधों से पीड़ित महिलाएँ, बाड़ चक्रवात भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण बेघर हो गयीं प्रवासी या शरणार्थी महिलाएँ, मानसिक रूप से विक्षिप्त महिलाएँ तथा आतंकवादी हिंसा की शिकार हुई महिलाएँ शामिल हैं। इन महिलाओं को परिवार का सहयोग न मिलने का कारण परिवार की आर्थिक अस्थिरता, संयुक्त परिवार प्रणाली का प्रचलन से बाहर होना, पीड़ित महिलाओं के बारे में सामाजिक पूर्वाग्रह आदि प्रमुख है।

उपरोक्त परिस्थितियों में तंगहाली में बेबसी का जीवन यापन कर रही महिलाओं के लिए स्वाधार नामक योजना लचीले दृष्टिकोण के साथ लायी गई है। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य बगैर किसी सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा के कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही महिलाआें के लिए भावनात्मक सुरक्षा के साथ ही उनकी आश्रय, खाद्यान्न, कपड़ा तथा देखभाल जैसी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करना है। इसमें महिलाओं के लिए उनके आर्थिक पुर्नवास को ध्यान में रखते हुए व्यवसायिक प्रशिक्षण तथा हैल्प लाईन की सुविधा भी दी जाती है।

यह योजना विभिन्न केंद्रों के माध्यम से चलाई जाती है। इस प्रकार के केंद्र स्वैच्छिक संस्थाएँ भी चला सकती हैं।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

केंद्र सरकार के मानव विकास मंत्रालय की योजना है जिसे राज्य सरकार, महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित कर रही है।

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

केंद्र में मानव संसाधन विकास मंत्रालय विभाग तथा राज्य में महिला एवं बाल विकास विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

योजना सभी पात्र हितग्राहियों के लिए है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

इस योजना का लाभ लेने के लिए निम्न वर्ग की महिलाओं को पात्र माना गया है-

  • अपने परिवार, रिश्तेदारों द्वारा परित्यक्त, उन धार्मिक स्थलों के पास छोड़ी गई सभी उम्र की विधवाएँ, निराश्रित व परित्यक्ता महिलाएँ, जहाँ वे शोषण का शिकार होती हैं।
  • जेल से रिहा और पारिवारिक समर्थन से वंचित पूर्व महिला कैदी।
  • बाढ़ चक्रवात भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण बेघर हो गयीं प्रवासी या शरणार्थी महिला, जिनको कोई सामाजिक आर्थिक समर्थन प्राप्त नहीं है।
  • खरीद फरोख्त की शिकार महिलाएँ, वेश्यालयों से छुड़ाई गई महिलाएँ, यौन शोषण व अपराधों से पीड़ित महिलाएँ, घर से भागी हुई महिलाएँ/लड़कियाँ जिनको या तो उनके परिवार ने ठुकरा दिया है या वे विभिन्न कारणों से अपने घर जाना नहीं चाहती।
  • आतंकवादी हिंसा की शिकार हुई महिलाएँ जिनके पास कोई पारिवारिक समर्थन तथा आजीविका के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं है।
  • मानसिक रूप से विक्षिप्त महिलाएँ (उनको छोड़कर जिन्हें मानसिक चिकित्सालय के विशिष्ट वातावरण में देखभाल की आवश्यकता है)
  • अपने परिवार द्वारा परित्यक्त, एच. आई. वी./एड्स से ग्रस्त महिलाएँ या ऐसी महिला जिसके पति की एच. आई. वी./एड्स के कारण मृत्यु हो चुकी हो और जिसे कोई सामाजिक /आर्थिक समर्थन प्राप्त नहीं है।
  • इसी प्रकार के कठिन परिस्थितियों में रहने वाली अन्य महिलाएँ।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

इस योजना में पात्रता रखने वाली सभी महिलाओं को लाभ दिए जाने की व्यवस्था है। चयन का आधार केवल यही है कि पीड़ित महिला का केंद्र से संपर्क हो जाए।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

इस योजना का क्रियान्वयन स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे केंद्रों के माध्यम से होता है। इसके लिए हितग्राही चयन की प्रक्रिया यही है कि उपरोक्त पात्र महिलाओं का संपर्क इन केंद्रों से हो जाए। केंद्र के कार्यकर्ता महिला को योजना का लाभ दिलाने के लिए पहल करेंगे।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

किसी भी प्रकार के दस्तावेज की आवश्यकता नहीं है। उन्हें केवल आवेदन भर देना होता है।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : महिला बाल विकास विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी।


वर्ग 2 - वृध्द

तेजी से बदलते समाज में वृध्द लोगों को हाशिये पर रख दिया गया है। आजीविका जुटाने के अवसर लगातार कठिन होती जा रही है, ऐसे में युवा वर्ग तो फिर भी अपनी रोजी रोटी की जुगाड़ शारीरिक श्रम के बल पर कर लेता है लेकिन अशक्त होते जा रहे शरीर के साथ इन वृध्दों के लिए तो वह भी मुश्किल मामला है। परिवार के साथ रहने वाले वृध्द फिर भी अपना गुजारा परिवार के साथ कर लेते हैं लेकिन जब आजीविका की तलाश में गरीब परिवारों को काम की तलाश में पलायन करना पड़े तो उस परिवार के बुर्जुर्गो की हालत और भी खराब हो जाती है। इसके अलावा समाज में एकल वृध्दों की संख्या बढ़ रही है जिनके पति या पत्नी का देहांत हो चुका है और बच्चे साथ नहीं रहते। इसमें उनकी असहायता और भी बढ़ जाती है। सरकार की इस प्रकार के निराश्रित वृध्दों के लिए योजनाओं के बारें में हम देखते हैं जो उनकी सामाजिक सुरक्षा को पूरा करता है।

2.1 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

समाज के 50 वर्ष या अधिक आयु की विधवा/परित्यक्ता महिलाएँ व 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के असहाय वृध्द जिनका कोई सहारा नहीं है व जो अपना जीवन यापन स्वयं के प्रयासों से करने में अक्षम हैं।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

राष्ट्रीय वृध्दावस्था पेन्शन योजना (सामाजिक सुरक्षा पेन्शन योजना)

योजना का संक्षिप्त विवरण

मध्यप्रदेश पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा समाज के नि:शक्त जनों की सामाजिक सुरक्षा के लिए यह योजना क्रियान्वित की जाती है। 15 अगस्त 1995 से भारत सरकार के राष्ट्रीय वृध्दावस्था पेन्शन योजना तथा राज्य की सामाजिक सुरक्षा पेन्शन योजना का एकीकरण कर इसे एकीकृत वृध्दावस्था एवं सामाजिक सुरक्षा पेन्शन योजना के नाम से चलाया जा रहा है। इस योजना का संचालन ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद पंचायतों के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है। पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिल सकें यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपी गई है। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य समाज के गरीबी की दशा में रह रहें निराश्रित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता पहुँचाना है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

इस योजना के तहत दी जाने वाली पेन्शन राशि का एक हिस्सा केंद्र सरकार तथा दूसरा हिस्सा राज्य सरकार के मद से आता है। ( वर्तमान में वृध्दों को 275 रुपये प्रतिमाह पेन्शन दिया जाता है जिसमें 200 रुपया केंद्र तथा 75 रुपया राज्य की हिस्सेदारी है।)

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

पंचायत एवं सामाजिक न्याय विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

लागू नहीं , जितने भी व्यक्ति पात्रता रखते हों सभी को इस योजना का लाभ मिलना है। वर्तमान में पूरे प्रदेश में 5 लाख 46 हजार 284 व्यक्तियों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

1. 60 वर्ष या अधिक आयु के वृध्द

2. 50 वर्ष या अधिक आयु की विधवा/परित्यक्ता महिलाएँ।
केवल उन्हीं व्यक्तियों को पेन्शन की पात्रता है, जो मध्यप्रदेश के निवासी हों।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

कोई भी निराश्रित जो पात्रता संबंधी अपेक्षाओं की पूर्ति करता है निर्धारित प्रारूप में आवश्यक प्रमाण पत्रों सहित आवेदन पत्र भरकर शहरी क्षेत्र की दशा में नगर पालिका/नगर निगम/नगर पंचायत में तथा ग्रामीण क्षेत्र की दशा में ग्राम पंचायत में जमा करेंगे। ग्रामीण क्षेत्र में जनपद पंचायत और नगरीय क्षेत्र में नगरीय निकायों द्वारा हितग्राहियों से प्राप्त पेन्शन आवेदन पत्र का परीक्षण कर सामाजिक सुरक्षा पेन्शन स्वीकृत की जाती है। इन हितग्राहियों को राशि रू. 275 प्रतिमाह की दर से सामाजिक सुरक्षा पेन्शन दी जाती है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

1. सामाजिक सुरक्षा पेन्शन हेतु प्रारूप- 1 जिसमें पाँच भाग है, में मुद्रित आवेदन पत्र नगर निगम/निगम पालिका/नगर पंचायत/जनपद पंचायत द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराया जावेगा। ग्रामीण क्षेत्र में जनपद पंचायत द्वारा मुद्रित फार्म प्रत्येक ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराये जाएँगे। जो इन्हें आवेदकों को उपलब्ध कराएगी। मुद्रित आवेदन पत्र उपलब्ध नहीं होने की दशा में निर्धारित प्रारूप में सादे कागज पर आवेदन दिया जा सकेगा।

2. कोई भी निराश्रित जो पात्रता संबंधी अपेक्षाओं की पूर्ति करता है, प्रारूप-1 पर निर्धारित आवेदन पत्र (यथा आवश्यक भाग दो से पाँच के प्रमाण पत्र सहित) भरकर शहरी क्षेत्र की दशा में नगर पालिका/नगर निगम/नगर पंचायत तथा ग्रामीण क्षेत्र की दशा में ग्राम पंचायत में देगा। ग्राम पंचायत प्राप्त सभी आवेदन पत्रों की यथा आवश्यक जाँच कराकर अपने अभिमत सहित सात दिवस के अंदर जनपद पंचायत को भेजेंगी।

3. शहरी क्षेत्र में नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत तथा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम जनपद पंचायत प्रारूप-2 में एक रजिस्टर रखेगी, जिसमें वह ग्राम पंचायत या शहरी क्षेत्र के निराश्रितों से या अन्य स्त्रोतों से प्राप्त आवेदन पत्र दर्ज करेगी, किंतु रजिस्टर में किसी प्रविष्टि के पहले निम्न शर्तो को पूरा करना आवश्यक है-

(क) 1. वयस्क आवेदक की स्थिति में निराश्रित की आयु का प्रमाणीकरण निर्वाचक नामावली में अंकित आयु के आधार पर सरपंच अथवा शहरी क्षेत्र की दशा में नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत के महापौर/प्रशासक/अध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया गया हो। 2. निराश्रित अवयस्क होने की स्थिति में आयु का प्रमाणीकरण नगर पालिका/नगर निगम/नगर पंचायत/ग्राम पंचायत की जन्म पंजी/चिकित्सक का प्रमाण पत्र/स्कूल प्रमाण पत्र के आधार पर माना जायेगा।

(ख) निराश्रित होने तथा आवेदक के भूमिहीन अथवा आय के पर्याप्त साधन न होने का प्रमाणीकरण सरपंच अथवा शहरी क्षेत्र की दशा में नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत के महापौर/प्रशासन/अध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा किया गया हो।

(ग) यदि आवेदक परित्यक्ता है तो, इस संबंध में ग्राम पंचायत/नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत के संबंधित बोर्ड मेंबर द्वारा प्रमाणीकरण किया गया हो। (इस संदर्भ में आवश्यक सभी प्रपत्रों का प्रारूप-चार डाउनलोड करें)

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

इस योजना का लाभ उठाने के लिए पाँच प्रकार के प्रपत्र व प्रमाणिकरण दस्तावेजो की आवश्यकता होगी जो ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध है। प्रपत्रों व प्रामणपत्रों का प्रारूप संलग्नक चार में दिया गया है।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र: ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, नगरीय स्थानीय निकाय, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जिला उप संचालक, पंचायत और समाज सेवा।


2.2 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

समाज के 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के गरीबी रेखा से नीचे के परिवार के असहाय वृध्द जिनका कोई सहारा नहीं है व जो अपना जीवन यापन स्वयं के प्रयासों से करने में अक्षम हैं।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वृध्दावस्था पेन्शन योजना

योजना का संक्षिप्त विवरण

भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्णयानुसार 19 नवम्बर 2007 से इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वृध्दावस्था पेन्शन योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना का क्रियान्वयन प्रदेश में सामाजिक न्याय विभाग कर रहा है। पूर्व के सामाजिक सुरक्षा पेन्शन योजना से यह योजना इस बात में भिन्न है कि इसमें केन्द्रांश (200 रुपये प्रति हितग्राही प्रतिमाह) ही पेन्शन दी जाती है। 25 जनवरी 2008 के सरकारी आदेश के अनुसार इस योजना के पूर्व प्रदेश में चल रहे सामाजिक सुरक्षा पेन्शन योजना के तहत जिन वृध्दों को लाभ दिया जा रहा था, उन्हें पूर्वत दर (275 रुपये प्रतिमाह प्रति हितग्राही) जारी रखा जाए। इस योजना का संचालन ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद पंचायतों के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है। पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिल सकें यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपी गई है। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य समाज के गरीबी की दशा में रह रहें निराश्रित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता पहुँचाना है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

इस योजना के तहत दी जाने वाली पेन्शन राशि का सारा खर्च केंद्र सरकार के मद से आता है।

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

पंचायत एवं सामाजिक न्याय विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

लागू नहीं, जितने भी व्यक्ति पात्रता रखते हों सभी को इस योजना का लाभ मिलना है। वर्तमान में पूरे प्रदेश में 8 लाख 69 हजार व्यक्तियों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

1- 65 वर्ष या अधिक आयु के वृध्द

2- 65 वर्ष या अधिक आयु की विधवा/परित्यक्ता महिलाएँ।

केवल उन्हीं व्यक्तियों को पेन्शन की पात्रता होती है, जो मध्यप्रदेश के निवासी हों।
(जुलाई 2008 में सरकार की तरफ से एक संशोधन आया है कि इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए वृध्द का नाम गरीबी रेखा की सूची में होना आवश्यक है। )

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

कोई भी निराश्रित जो पात्रता संबंधी अपेक्षाओं को पूर्ति करता है निर्धारित प्रारूप में आवश्यक प्रमाण पत्रों सहित आवेदन पत्र भरकर शहरी क्षेत्र की दशा में नगर पालिका/नगर निगम/नगर पंचायत में तथा ग्रामीण क्षेत्र की दशा में ग्राम पंचायत में जमा करेंगे। ग्रामीण क्षेत्र में जनपद पंचायत और नगरीय क्षेत्र में नगरीय निकायों द्वारा हितग्राहियों से प्राप्त पेन्शन आवेदन पत्र का परीक्षण कर पेन्शन स्वीकृत की जाती है। इन हितग्राहियों को राशि रू. 200 प्रतिमाह की दर से वृध्दावस्था पेन्शन दी जाती है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

1- इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वृध्दावस्था पेन्शन हेतु प्रारूप - 1 जिसमें पाँच भाग है, में मुद्रित आवेदन पत्र नगर निगम/निगम पालिका/नगर पंचायत/जनपद पंचायत द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराया जावेगा। ग्रामीण क्षेत्र में जनपद पंचायत द्वारा मुद्रित फार्म प्रत्येक ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराये जाएँगे। जो इन्हें आवेदकों को उपलब्ध कराएगी। मुद्रित आवेदन पत्र उपलब्ध नहीं होने की दशा में निर्धारित प्रारूप में सादे कागज पर आवेदन दिया जा सकेगा।

2- कोई भी निराश्रित जो पात्रता संबंधी अपेक्षाओं की पूर्ति करता है, प्रारूप-1 पर निर्धारित आवेदन पत्र (यथा आवश्यक भाग दो से पाँच के प्रमाण पत्र सहित) भरकर शहरी क्षेत्र की दशा में नगर पालिका/नगर निगम/नगर पंचायत में जाएगी। ग्राम पंचायत प्राप्त सभी आवेदन पत्रों की यथा आवश्यक जाँच कराकर अपने अभिमत सहित सात दिवस के अंदर जनपद पंचायत को भेजेगी।

3- शहरी क्षेत्र में नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत तथा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम जनपद पंचायत प्रारूप-2 में एक रजिस्टर रखेगी, जिसमें वह ग्राम पंचायत या शहरी क्षेत्र के निराश्रितों से या अन्य स्त्रोतों से प्राप्त आवेदन पत्र दर्ज करके पंचायत को भेजेगी। किंतु रजिस्टर में किसी प्रविष्टि के पहले निम्न शर्तो को पूरा करना आवश्यक है-

(क) 1. वयस्क आवेदक की स्थिति में निराश्रित की आयु का प्रमाणीकरण निर्वाचक नामावली में अंकित आयु के आधार पर सरपंच अथवा शहरी क्षेत्र की दशा में नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत के महापौर/प्रशासक/अध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया गया हो। 2. निराश्रित अवयस्क होने की स्थिति में आयु का प्रमाणीकरण नगर पालिका/नगर निगम/नगर पंचायत/ग्राम पंचायत की जन्म पंजी/चिकित्सक का प्रमाण पत्र/स्कूल प्रमाण पत्र के आधार पर माना जायेगा।

(ख) निराश्रित होने तथा आवेदक के भूमिहीन अथवा आय के पर्याप्त साधन न होने का प्रमाणीकरण सरपंच अथवा शहरी क्षेत्र की दशा में नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत के महापौर/प्रशासन/अध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा किया गया हो।

(ग) यदि आवेदक परित्यक्ता है तो, इस संबंध में ग्राम पंचायत/नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत के संबंधित बोर्ड मेम्बर द्वारा प्रमाणीकरण किया गया हो। (इस संदर्भ में आवश्यक सभी प्रपत्रों का प्रारूप-चार डाउनलोड करें)

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

इस योजना का लाभ उठाने के लिए पाँच प्रकार के प्रपत्र व प्रमाणिकरण दस्तावेजो की आवश्यकता होगी जो ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध है। प्रपत्रों व प्रामणपत्रों का प्रारूप संलग्नक चार में दिया गया है।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र: ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, नगरीय स्थानीय निकाय, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जिला उप संचालक, पंचायत और समाज सेवा।


वर्ग 3 - बीमार/लाचार

गरीब व्यक्ति के लिए बीमारी एक ऐसी परिस्थिति है जो उसकी आजीविका को बुरी तरह प्रभावित करती है। इसके साथ अगर असहायता जुड़ जाए तो हालत और भी गंभीर हो जाती है। बीमारी से निपटने के लिए संसाधन विहीन लोगों के लिए सरकार स्वभाविक अभिवाहक के रूप में कार्य करती है। ऐसे ही कुछ सरकारी प्रयास हैं जो निम्न वर्ग के लोगों को बीमारी व असहायता की स्थिति में सुरक्षा प्रदान करते है।

3.1 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

समाज का वह गरीब व्यक्ति तथा उसका परिवार जो असाध्य बीमारी से पीड़ित है और जिसके पास अपनी बीमारी का इलाज कराने के लिए पैसे नहीं है। ऐसे परिवारों के सदस्य जिसमें पति, पत्नी, नाबालिग बच्चे, आश्रित माता पिता, आश्रित विधवा या परित्यक्ता पुत्री शामिल हैं।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

दीनदयाल अन्त्योदय उपचार योजना

योजना का संक्षिप्त विवरण

राज्य सरकार द्वारा समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर व वंचित तबके, खासतौर पर वे लोग जो सामाजिक श्रेणीक्रम में सबसे निचले पायदान पर हैं, उनके लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए इस योजना की शुरुआत की है। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य बीमारी की अवस्था में गरीब लोगों को ऋणग्रस्तता की स्थिति से बचाना है।

प्राय: यह देखने में आता है कि शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में भी समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग को स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं या कम मात्रा में ही मिल पाती हैं। जबकि गरीबी रेखा के ऊपर जीवन यापन करने वाले संपन्न लोग इन सेवाओं का भरपूर उपयोग करते है। शासन द्वारा उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का गरीब तबका भी उपयोग कर सके, इस उद्देश्य से यह योजना पूरे मध्यप्रदेश में लागू है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

इस योजना के तहत सहायता प्रदान करने के लिए कोई लक्ष्य निर्धरित नहीं किया गया है। जितने भी मामले आएंगे, उनको सहायता देने का प्रावधान है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

यह योजना समाज के उन लोगों के लिए है जो गरीबी की स्थिति में जी रहें है। इसके अनर््तगत केवल उन्हीं परिवारों को पात्रता प्रदान की गई हैं जिनका गरीबी रेखा की सूची के साथ अन्त्योदय में भी नाम हो। गरीबी रेखा की सूची के अनर््तगत आने वाले परिवार के हर सदस्य को बीमारी की स्थिति में शासकीय अस्पतालों में नि:शुल्क जाँच व इलाज की पात्रता होगी। इस योजना के अनर््तगत परिवार के सदस्य पति, पत्नी, नाबालिग बच्चे, आश्रित माता पिता, आश्रित विधवा या परित्यक्ता पुत्री योजना का लाभ लेने के लिए पात्र रहेंगे। ध्यान रखें कि परिवार की पात्रता तभी तक होगी जब तक कि उसका नाम गरीबी रेखा की सूची में है। नई सूची बनने पर यदि परिवार का नाम सूची से बाहर आ जाता है तो उसकी इस योजना के लिए पात्रता समाप्त हो जाएगी।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

इस योजना के तहत लाभ लेने के लिए हितग्राहियों का चयन अन्त्योदय कार्ड के आधार पर किया जाता है। गाँव में जितने भी परिवारों के पास अन्त्योदय कार्ड है सभी इस योजना के स्वमेव पात्र होंगे। इसके लिए उन्हें निकटस्थ स्वास्थ्य केंद्र से उपचार योजना का कार्ड बनवाना होगा जिसे बीमारी की स्थिति में स्वास्थ्य केंद्र/अस्पताल में दिखाना होगा।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

दीन दयाल अन्त्योदय उपचार योजना के क्रियान्वयन के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को एक स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाता है जिसमें परिवार के मुखिया का फोटो लगा होता है। यह कार्ड जिला मुख्यालय के नगर में निवास करने वाले पात्र परिवारों को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा तथा अन्य स्थानों में निवास करने वाले पात्र परिवारों को खण्ड चिकित्सा अधिकारी द्वारा प्रदान किया जाता है। कार्ड में परिवार के सभी सदस्यों का विवरण अंकित किया जाता है। प्रत्येक परिवार को एक साल में 30 हजार रुपये तक की स्वास्थ्य जाँच व उपचार सुविधा नि:शुल्क प्रदान किया जाता है। कार्ड धारी परिवार के किसी भी सदस्य के गंभीर रूप से बीमार पड़ने की स्थिति में प्रदेश के किसी भी शासकीय स्वास्थ्य संस्थान जहाँ भरती की सुविधा हो नि:शुल्क इलाज कराया जा सकता है। यहाँ यह बात ध्यान रखने की है कि किसी भी स्थिति में मरीज को नकद राशि इस योजना के तहत नहीं दी जाती है । (इस योजना के तहत स्वास्थ्य कार्ड हेतु आवेदन पत्र का प्रारूप-पाँच डाउनलोड करें)

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

योजना का लाभ लेने के लिए परिवार का नाम गरीबी रेखा की सूची में होना आवश्यक है। गरीबी रेखा का कार्ड व क्रमांक के साथ आवेदन के साथ गरीबी रेखा एवं जाति प्रमाणपत्र तथा परिवार के सदस्यों का प्रमाण पत्र/गरीबी रेखा का नीला राशन कार्ड/अन्त्योदय अन्न कार्ड एवं पासपोर्ट साइज का फोटो संलग्न करना है।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : ग्राम सभा/ग्राम पंचायत, स्वास्थ्य कार्यकर्ता।


3.2 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

घातक व जानलेवा बीमारियों से पीड़ित गरीबी रेखा की सूची के अनर््तगत आने वाले परिवार का सदस्य।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

जिला/राज्य बीमारी सहायता निधि

योजना का संक्षिप्त विवरण

मध्यप्रदेश सरकार ने अपने प्रदेश में रह रहे सभी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को घातक व जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने व इसके इलाज के लिए शासन द्वारा 25 हजार से लेकर डेढ़ लाख तक की सहायता राशि उपलब्ध कराने के लिए यह योजना प्रारंभ की है। इस योजना के तहत 25000 से 75000 रु. तक के प्रकरणों का निर्णय प्रभारी मंत्री तथा जिला कलेक्टर द्वारा तथा 75000 से 150000 रु. तक के प्रकरणों का निर्णय लोक स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण, मध्यप्रदेश द्वारा लिया जाता है। इस सुविधा का लाभ केवल शासकीय अस्पताल अथवा राज्य शासन द्वारा मान्यता प्राप्त निर्धारित अस्पतालों में इलाज कराने पर ही मिलता है। सहायता राशि का चेक अस्पताल के नाम पर होगा। इस योजना का लाभ एक व्यक्ति को एक बार ही मिल सकता है। 24 फरवरी 2007 के आदेश के अनुसार कैंसर व ब्रेन टयूमर के इलाज की राशि संशोधित करके 2 लाख तक कर दी गई है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

इस योजना के तहत सहायता प्रदान करने के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। जितने भी मामले आएंगे, उनको सहायता देने का प्रावधान है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

इस योजना का लाभ लेने के लिए हितग्राही को मध्यप्रदेश राज्य का निवासी तथा उसका गरीबी रेखा में नाम होना ज़रूरी है।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को अपने आवश्यक कागजातों के साथ जिला सिविल सर्जन को अपनी बीमारी बताते हुए आवेदन करना पड़ता है। आवेदन पर राज्य स्तर से स्वीकृति दी जाती है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

जिला/राज्य बीमारी सहायता निधि का आवेदन पत्र किसी भी स्वास्थ्य केंद्र से प्राप्त करके उसे भरने के बाद कलेक्टर के माध्यम से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पास जमा किया जाता है। सिविल सर्जन द्वारा प्रमाण पत्र हस्ताक्षरित होने पर आवेदन पत्र आवेदक द्वारा स्वयं/पत्र वाहक के द्वारा/डाक द्वारा स्वास्थ्य आयुक्त व सचिव राज्य बीमारी सहायता कोष संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएँ मध्यप्रदेश, 5वीं मंजिल सतपुड़ा भवन को प्रस्तुत किया जाए। (इस योजना के तहत आवेदन पत्र का प्रारूप-छ: डाउनलोड करें)

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

गरीबी रेखा का कार्ड, निवासप्रमाणपत्र

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी


3.3 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

घातक व जानलेवा बीमारी एच. आई. वी./एड्स से संक्रमित असहाय लोग।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

एड्स नियंत्रण समिति द्वारा संचालित योजनाएँ

योजना का संक्षिप्त विवरण

एच. आई वी./एड्स से पीड़ित व्यक्ति के लिए हाल में सरकार ने मध्यप्रदेश के इन्दौर, भोपाल तथा जबलपुर में एन्टी रेक्ट्रोरेल थेरेपी सेंटर स्थापित किया है। इन सेंटरों पर एच. आई वी./एड्स से संक्रमित व्यक्ति को नि:शुल्क दवाइयाँ दी जाती हैं जिससे उनके संक्रमण के प्रभाव को कम किया जा सके। इन सेंटरों तक आने के लिए बाहर के मरीजों को यात्रा में 50 प्रतिशत तक की छूट भी दिया जाता है।

इसके साथ ही उज्जैन तथा इन्दौर में कम्युनिटी केयर सेंटर की स्थापना की गई है। जहाँ एच. आई वी./एड्स संक्रमित व्यक्तियों को 5 से 14 दिन तक रख कर उनका इलाज किया जाता है। यह पूरी तरह नि:शुल्क होता है। इलाज के दौरान मरीज के रहने खाने का इंतजाम सेंटर पर नि:शुल्क किया जाता है।

इसके अलावा राज्य के सभी जिला केन्द्रों के सरकारी अस्पतालों में एच. आई वी./एड्स संक्रमण की जाँच नि:शुल्क की जाती है। नाको इस महामारी के रोकथाम के लिए प्रचार प्रसार की अपनी गतिविधियाँ विभिन्न विभागों के साथ मिलकर चला रहा है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

केंद्र सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम - तृतीय के लक्ष्यों के अनुसार तय किया गया है कि मध्यप्रदेश राज्य में वर्ष 2012 तक इस महामारी पर रोक के लिए इसके नए संक्रमण को 60 प्रतिशत तक कम किया जाए।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

नाको के कार्यक्रमों का लाभ सभी लोगों के लिए हैं जो, एच.आई.वी/एड्स संक्रमित हैं या जिन्हें इसकी आशंका है।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

इन कार्यक्रमों का लाभ उठाने के लिए सभी हितग्राही है, हमें ही पहल करनी है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

निकट के स्वास्थ्य केंद्र में जाकर नि:शुल्क जाँच कराना। यदि पॉजीटिव हो तो तुरंत चिकित्साधिकारी से संपर्क करना चाहिए।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

कोई दस्तावेज आवश्यक नहीं हैं।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी, स्वास्थ्य कार्यकर्ता।


वर्ग 4 - शारीरिक रूप से नि:शक्त/विकलांग

शारीरिक नि:शक्तता स्वयं परिभाषित है। ऐसी चुनौतियों का सामना कर रहे समाज के बड़े हिस्से को सुरक्षा देने के लिए सरकारी प्रयासों की हम मदद ले सकते हैं।

4.1 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

समाज के असहाय शारीरिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति जिनका कोई सहारा नहीं है व जो अपना जीवन यापन स्वयं के प्रयासों से करने में अक्षम हैं।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

सामाजिक सुरक्षा पेन्शन योजना

योजना का संक्षिप्त विवरण

मध्यप्रदेश पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा समाज के नि:शक्त जनों की सामाजिक सुरक्षा के लिए यह योजना क्रियान्वित की जाती है। 15 अगस्त 1995 से भारत सरकार के राष्ट्रीय वृध्दावस्था पेन्शन योजना तथा राज्य की सामाजिक सुरक्षा पेन्शन योजना का एकीकरण कर इसे एकीकृत वृध्दावस्था एवं सामाजिक सुरक्षा पेन्शन योजना के नाम से चलाया जा रहा है। इस योजना का संचालन ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद पंचायतों के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है। पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिल सकें यह सुनिश्चित् करने की जिम्मेदारी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपी गई है। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य समाज के गरीबी की दशा में रह रहे निराश्रित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता पहुँचाना है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

इस योजना के तहत दी जाने वाली पेन्शन राशि का एक हिस्सा केंद्र सरकार तथा दूसरा हिस्सा राज्य सरकार के मद से आता है। (वर्तमान में शारीरिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति को 150 रुपये प्रतिमाह पेन्शन दिया जाता है जिसमें 75 रुपया केंद्र तथा 75 रुपया राज्य की हिस्सेदारी है।)

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

पंचायत एवं सामाजिक न्याय विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

लागू नहीं, जितने भी व्यक्ति पात्रता रखते हों सभी को इस योजना का लाभ मिलना है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

6 वर्ष से अधिक आयु के विकलांग व्यक्ति। इसमें से 6 से 14 वर्ष के विकलांगों को सहायता की पात्रता तभी होगी जब वे किसी स्कूल में भर्ती होकर वहाँ पढ़ाई कर रहे हों। सभी गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों के 6 से 14 वर्ष के वे विकलांग बच्चे जो स्कूल जाते हैं। भले ही वे निराश्रित न हों। केवल उन्हीं व्यक्तियों को पेन्शन की पात्रता होती है, जो मध्यप्रदेश के निवासी हों।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

कोई भी निराश्रित जो पात्रता संबंधी अपेक्षाओं को पूर्ति करता है निर्धारित प्रारूप में आवश्यक प्रमाण पत्रों सहित आवेदन पत्र भरकर शहरी क्षेत्र की दशा में नगर पालिका/नगर निगम/नगर पंचायत में तथा ग्रामीण क्षेत्र की दशा में ग्राम पंचायत में जमा करेंगे। ग्रामीण क्षेत्र में जनपद पंचायत और नगरीय क्षेत्र में नगरीय निकायों द्वारा हितग्राहियों से प्राप्त पेन्शन आवेदन पत्र का परीक्षण कर सामाजिक सुरक्षा पेन्शन स्वीकृत की जाती है। इन हितग्राहियों को राशि रू. 150 प्रतिमाह की दर से सामाजिक सुरक्षा पेन्शन दी जाती है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

1.      सामाजिक सुरक्षा पेन्शन हेतु प्रारूप- 1 जिसमें पाँच भाग है, में मुद्रित आवेदन पत्र नगर निगम/निगम पालिका/नगर पंचायत/जनपद पंचायत द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराया जावेगा। ग्रामीण क्षेत्र में जनपद पंचायत द्वारा मुद्रित फार्म प्रत्येक ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराये जाएँगे। जो इन्हें आवेदकों को उपलब्ध कराएगी। मुद्रित आवेदन पत्र उपलब्ध नहीं होने की दशा में निर्धारित प्रारूप में सादे कागज पर आवेदन दिया जा सकेगा।

2.      कोई भी निराश्रित जो पात्रता संबंधी अपेक्षाओं की पूर्ति करता है, प्रारूप-1 पर निर्धारित आवेदन पत्र (यथा आवश्यक भाग दो से पाँच के प्रमाण पत्र सहित) भरकर शहरी क्षेत्र की दशा में नगर पालिका/नगर निगम/नगर पंचायत में जाएगी। ग्राम पंचायत प्राप्त सभी आवेदन पत्रों की यथा आवश्यक जाँच कराकर अपने अभिमत सहित सात दिवस के अंदर जनपद पंचायत को भेजेगी।

3.      शहरी क्षेत्र में नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत तथा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम जनपद पंचायत प्रारूप-2 में एक रजिस्टर रखेगी, जिसमें वह ग्राम पंचायत या शहरी क्षेत्र के निराश्रितों से या अन्य स्त्रोतों से प्राप्त आवेदन पत्र दर्ज करके पंचायत को भेजेगी। किंतु रजिस्टर में किसी प्रविष्टि के पहले निम्न शर्तो को पूरा करना आवश्यक है-

(क) 1. वयस्क आवेदक की स्थिति में निराश्रित की आयु का प्रमाणीकरण निर्वाचक नामावली में अंकित आयु के आधार पर सरपंच अथवा शहरी क्षेत्र की दशा में नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत के महापौर/प्रशासक/अध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया गया हो। 2. निराश्रित अवयस्क होने की स्थिति में आयु का प्रमाणीकरण नगर पालिका/नगर निगम/नगर पंचायत/ग्राम पंचायत की जन्म पंजी/चिकित्सक का प्रमाण पत्र/स्कूल प्रमाण पत्र के आधार पर माना जायेगा।

(ख) निराश्रित होने तथा आवेदक के भूमिहीन अथवा आय के पर्याप्त साधन न होने का प्रमाणीकरण सरपंच अथवा शहरी क्षेत्र की दशा में नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत के महापौर/प्रशासन/अध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा किया गया हो।

(ग) यदि आवेदक परित्यक्ता है तो, इस संबंध में ग्राम पंचायत/नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत के संबंधित बोर्ड मेम्बर द्वारा प्रमाणीकरण किया गया हो। (इस संदर्भ में आवश्यक सभी प्रपत्रों का प्रारूप-चार डाउनलोड करें)

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

इस योजना का लाभ उठाने के लिए पाँच प्रकार के प्रपत्र व प्रमाणिकरण दस्तावेजो की आवश्यकता होगी जो ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध है। प्रपत्रों व प्रामणपत्रों का प्रारूप संलग्नक चार में दिया गया है।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, नगरीय स्थानीय निकाय, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जिला उपसंचालक, पंचायत और समाज सेवा।


4.2 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

शारीरिक रूप से नि:शक्त बच्चे

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

विकलांग बच्चों के लिए समेकित शिक्षा योजना (IED) (केंद्र प्रवर्तित)

योजना का संक्षिप्त विवरण

इस योजना के तहत विकलांग बच्चों को उनकी विशेष आवश्यकता अनुसार विशेष प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों के द्वारा शैक्षणिक सुविधाएँ प्रदान कर सुलभ वातावरण उपलब्ध कराया जाता है। योजना में विकलांग बच्चों को गणवेश के लिए रुपये 200 प्रतिवर्ष तथा पुस्तक सामग्री के लिए रुपये 400 प्रतिवर्ष, वाहन भत्ता 50 रुपये तथा नेत्रहीन बच्चों के लिए कक्षा-5 के बाद 50 रुपये प्रतिमाह की दर से वाचक भत्ता दिया जाता है। शरीर के निचले भाग से अत्यधिक विकलांगता से ग्रस्त पृथक-पृथक विकलांगों के लिए 75 रुपये प्रतिमाह मार्ग रक्षण भत्ता और पाँच वर्षों के लिए उपकरण का वास्तविक मूल्य अधिकतम रुपये 2000 दिया जाता हैं। योजना प्रदेश के सभी 48 जिलों के 313 विकासखण्डों में लागू है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

केंद्र सरकार व राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

स्कूल शिक्षा विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

योजना के तहत कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं है, सभी पात्र हितग्राहियों को इसका लाभ देने की बात है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

शारीरिक रूप से विकलांग बच्चे, जो स्कूल जाना चाहते हो या जा रहे हों।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

कम से कम एक डाक्टर एक मनौवैज्ञानिक और एक विशेष प्रशिक्षण के दल द्वारा विकलांगता वार बच्चों की पहचान करने का प्रयास किया जाता है। इसके बाद उनका मूल्यांकन किया जाता है। योजनांतर्गत 40 प्रतिशत या अधिक की विकलांगता को ही हितग्राही के रूप में मान्य किया जाता है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

आवेदन की आवश्यकता नहीं है। मध्यप्रदेश में योजना का क्रियान्वयन स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत वर्ष 1992 से है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये स्वास्थ्य महिला और बाल विकास, समाज कल्याण, शिक्षा विभाग तथा स्वयंसेवी संगठनों के समन्वित प्रयास के लिये समन्वय समितियों का गठन किया जाता है। इसके तहत शिविर में चयनित बच्चों को इस योजना का लाभ प्रदान किया जाता है।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

विकलांगता प्रमाणपत्र

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : स्कूल प्राचार्य, पंचायत, शिक्षा विभाग के कर्मचारी।


4.3 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

6 से 21 वर्ष आयु के ऐसे विकलांग जो पढ़ाई में तेज हैं, किंतु आर्थिक संसाधनों के अभाव में अपनी पढ़ाई जारी रखने में असमर्थ हैं।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

विकलांग छात्रवृत्ति

योजना का संक्षिप्त विवरण

प्रदेश के सभी वर्ग के ऐसे विकलांग छात्र-छात्राएँ जो पूर्व माध्यमिक शाला से आगे स्नातकोत्तर या व्यवसायिक स्नातक परीक्षा में नियमित रूप से शिक्षण प्रशिक्षण प्राप्त कर रहें हो उन्हें छात्रवृत्ति स्वीकृत की जाती हैं। छात्राओं को रुपये 10#- अतिरिक्त स्वीकृत किया जाता है।

राज्य छात्रवृत्ति

प्राथमिक स्तर : रुपये 25 प्रतिमाह

माध्यमिक स्तर : रुपये 30 प्रतिमाह

उच्चतर माध्यमिक स्तर : रुपये 35 प्रतिमाह

कक्षा 9 से 10,12 और आई. टी. आई. (40 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने पर) 85 रुपये 140 रुपये

बी.ए.,बी.काम., बी.एस.सी. 125 रुपये 180 रुपये

स्नातकोत्तर और व्यवसायिक स्नातक परीक्षा 170 रुपये 240 रुपये

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

केंद्र व राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

सामाजिक न्याय विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

कोई बंधन नहीं है जितने पात्र हितग्राही हैं सभी को इस योजना के तहत छात्रवृत्ति मिलेगी।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

6 से 21 वर्ष आयु के ऐसे विकलांग जो प्रायमरी, मिडिल, हायर सेकेन्डरी, आई.टी.आई., बी.ए., बी.काम, बी.एच.एस.सी., स्नातकोत्तर और व्यवसायिक स्नातक परीक्षाएँ प्रतिवर्ष लगातार उत्तीर्ण कर रहे हों।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

नि:शक्त छात्र छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित आवेदन अपनी नि:शक्तता दर्शाते हुए फोटोग्राफ के साथ नि:शक्तता और निवास प्रमाण पत्र सहित शैक्षणिक संस्था के प्रमुख के माध्यम से शहरी क्षेत्र के आवेदन पत्र जिले विभागीय जिला अधिकारी पंचायत एवं सामाजिक न्याय को तथा ग्रामीण क्षेत्र के आवेदन पत्र मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत को प्रेषित करते है। सक्षम अधिकारी परीक्षण के बाद छात्रवृत्ति स्वीकृत करते हैं। (इस योजना के तहत लाभ उठाने हेतु निर्धारित आवेदन पत्र का प्रारूप-सात डाउनलोड करें)

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

नि:शक्त छात्रवृत्ति की स्वीकृति के लिए नि:शक्तजन अपना आवेदन पत्र शैक्षणिक संस्था प्रमुख को आवश्यक कागजातों के साथ प्रस्तुत कर सकते है। इन जानकारियों के साथ आवेदन पत्र सक्षम अधिकारी को शैक्षणिक संस्था प्रमुख के माध्यम से भेजा जाता है। इसके बाद स्वीकृति प्राप्त होने पर पात्रतानुसार छात्र को वर्ष में 10 माह के मान से छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

  • आवेदन पत्र में नि:शक्तता दर्शाने वाला फोटो।
  • अभिभावक/माता-पिता की आयु का प्रमाण पत्र।
  • नि:शक्तता का प्रमाण पत्र जो शासकीय चिकित्सक द्वारा प्रदान किया गया हो।
  • मूल प्रमाण पत्र संबंधी प्रमाण पत्र।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र: शैक्षणिक संस्था प्रमुख, विकासखण्ड स्तर पर पंचायत एवं समाज शिक्षा संगठन, जिला स्तर पर संयुक्त संचालक/उप संचालक, पंचायत एवं सामाजिक न्याय, राज्य स्तर पर आयुक्त, पंचायत एवं सामाजिक न्याय, राज्य स्तर पर आयुक्त, पंचायत एवं सामाजिक न्याय, मध्यप्रदेश।


4.4 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

समाज के शारीरिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति, जो बगैर बाह्य उपकरणों के अपने दैनिक कार्यों को करने में अक्षम हो।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

नि:शक्त व्यक्तियों को विशेष साधन/उपकरण प्रदाय योजना।

योजना का संक्षिप्त विवरण

इस योजना का उद्देश्य अस्ति बाधित, दृष्टि बाधित, श्रवण बाधित और नि:शक्त व्यक्तियों को शारीरिक दोष दूर करने के लिए विशेष साधन-उपकरण प्रदाय करना है। इस योजना के अनर््तगत प्रदेश के अस्ति बाधित, श्रवण बाधित नि:शक्त को नि:शक्तता के आधार पर और विशेषज्ञ को सलाह से प्रत्यारोपण ट्रायसेकल, कृत्रिम हाथ, कृत्रिम पैर, आर्थोपेडिक जूते, कैलीपर्स, बेसाखी और श्रवण यंत्र आदि उपकरण/साधन उपलब्ध कराये जाते हैं।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

पंचायत एवं सामाजिक न्याय

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

कोई स्पष्ट लक्ष्य नहीं है। प्रति वर्ष संबंधित जिले के कलेक्टर को लक्ष्य आवंटन किया जाता है। जिसमें जिले के पात्र हितग्राहियों को इस योजना के तहत उपकरण दिया जा सके।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

  • ऐसे हितग्राही छात्र-छात्राएँ जो पहली कक्षा से स्नातक एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हों और जिनकी आयु 16 से 25 वर्ष के बीच हो।
  • जिनके माता-पिता/अभिभावक की वार्षिक आय रुपये 24,000 से कम हो।
  • 16 वर्ष से 55 वर्ष की उम्र के बीच के नि:शक्त व्यक्ति जिन्हें अपना काम पूरा करने के लिए विशेष साधन/उपकरण की आवश्यकता हो और वे स्वयं इसको खरीदने में समर्थ न हों, उनको ही विशेष साधन उपलब्ध कराये जाते हैं।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

जिला स्तर या तहसील स्तर पर या अन्य शिविरों के माध्यम से नि:शक्त को विशेषज्ञ द्वारा परीक्षण कराकर उनके लिए सुझाए गये कृत्रिम अंग/उपकरण उपलब्ध कराये जाते हैं। इसके अतिरिक्त उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से ही उपकरण दिये जाते हैं। ऐसे विशेष उपकरण/साधन, हितग्राही को एक बार दिये जाने का प्रावधान है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

योजना का लाभ लेने के लिए विकास खण्ड अधिकारी या संयुक्त संचालक/उपसंचालक, संभागीय व्यवस्थापक पंचायत एवं सामाजिक न्याय के जिला कार्यालय में निर्धारित आवेदन भर कर जमा करना होता है। (इस संदर्भ में आवश्यक सभी प्रपत्रों के प्रारूप-आठ डाउनलोड करें)

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

भरा हुआ आवेदन प्रपत्र के साथ अपंगता प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र (नायब तहसीलदार अथवा राजस्व अधिकारी द्वारा जारी किया हुआ) तथा छात्र द्वारा उत्तीर्ण किए गए कक्षा की अभिप्रमाणित अंकसूची।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : विकास खण्ड अधिकारी या संयुक्त संचालक/उपसंचालक, पंचायत एवं सामाजिक न्याय।


4.5 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

नि:शक्त व्यक्ति सभी उम्र व सभी वर्ग के जिन्हें अपनी नि:शक्तता की पहचान बतानी पड़ती है।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

नि:शक्तता परिचय पत्र/पास बुक

योजना का संक्षिप्त विवरण

नि:शक्त व्यक्यिों को भारत सरकार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता की दृष्टि से नि:शक्तता परिचय पत्र/पास बुक का वितरण प्रदेश में भी किये जा रहे हैं। आम तौर पर देखा जाता है कि शारीरिक रूप से नि:शक्त व्यक्तियों को शासन की योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए उनकी नि:शक्ता पहचान व प्रमाणपत्र एक आवश्यक दस्तावेज है, किंतु यही प्राप्त करने में नि:शक्त व्यक्तियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके निदान के लिए सरकार ने नि:शक्त व्यक्तियों को पहचान पत्र देने की योजना प्रारंभ की है। नि:शक्त व्यक्तियों को नि:शुल्क परिचय पत्र/पास बुक के वितरण, कार्यवाही प्रदेश स्तर पर प्रत्येक विभागीय जिला अधिकारी के माध्यम से उपलब्ध करायी जा रही है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

केंद्र व राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

सामाजिक न्याय विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

इस योजना के तहत कोई लक्ष्य नहीं है सभी नि:शक्तों का पहचान पत्र बनना है ।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण एवं पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 की धारा-2 के तहत परिभाषित नि:शक्तता के 7 संवर्ग को उपलब्ध कराया जाता है।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

योजना के तहत सभी पात्र हितग्राहियों को इसका लाभ मिलना है अत: चयन नहीं किया जाना है ।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

प्रत्येक नि:शक्त व्यक्ति को जिला मेडिकल बोर्ड के माध्यम से प्राप्त नि:शक्ता प्रमाण-पत्र की साक्ष्यांकित छायाप्रति शहरी क्षेत्र हेतु विभागीय जिला अधिकारी पंचायत एवं सामाजिक न्याय तथा ग्रामीण क्षेत्र के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत को आवेदन पत्र निर्धारित प्रपत्र में प्रस्तुत किये जाना चाहिए।

विहित प्राधिकारी को आवेदन पत्र निर्धारित प्रपत्र में प्रस्तुत किये जाने के उपरांत 15 दिवस में नि:शक्तता परिचय पत्र/पास बुक हितग्राहियों को उपलब्ध कराया जाता है। (इस योजना के तहत प्रमाण पत्र तथा परिचय पत्र हेतु आवेदन पत्र के लिए प्रारूप-नौ डाउनलोड करें)

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

जिला चिकित्सालय द्वारा जारी नि:शक्ता प्रमाण पत्र की फोटो कॉपी, भरा हुआ आवेदन पत्र दो पासपोर्ट आकार के फोटो।


4.6 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

दृष्टि व श्रवण बाधित बच्चे, छात्र जो सामान्य विद्यालयों में अपनी पढ़ाई नहीं कर सकते।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

दृष्टि बाधितार्थ और श्रवण बाधितार्थ शासकीय विद्यालय भोपाल, सागर, खरगोन

योजना का संक्षिप्त विवरण

इस योजना का उद्देश्य दृष्टि और श्रवण बाधित बालक को पाँचवीं कक्षा तक शिक्षण प्रशिक्षण देकर उन्हें यथा संभव आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने का प्रयास करना है। इसके अनर््तगत दृष्टि बाधित और श्रवण बाधितों को शिक्षण प्रशिक्षण सुविधाएँ प्रदान कर उनका पुनर्वास किया जाता है भोपाल की संस्था में छात्रवासी और गैर छात्रवासी के प्रवेश के लिए 100 छात्र संख्या निर्धारित हैं सागर और खरगोन में 50 छात्रावासी और गैर छात्रावासी संख्या निर्धारित है। इस योजना के तहत ऐसे दृष्टि और श्रवण बाधित छात्र को जिनके माता पिता/अभिभावक की वार्षिक आय 12000 से कम हो एवं गरीबी रेखा के नीचे आते हो, को नि:शुक्ल छात्रावासी सुविधा जिसमें वस्त्र चिकित्सा आदि सम्मिलित हैं उपलब्ध करायी जाती है दैनिक छात्रों को नि:शुक्ल शिक्षण प्रशिक्षण की सुविधा दी जाती है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

सामाजिक न्याय विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

विद्यालय में निर्धारित संख्या में ही छात्रों का प्रवेश होता है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

6 से 12 वर्ष के दृष्टिहीन और मूक बधिर बालक जो मध्यप्रदेश के निवासी हो। इस योजना में छात्रावासी सुविधा के लिए माता पिता की वार्षिक आय रुपये 12000 से कम हो एवं परिवार गरीबी रेखा के नीचे आते है।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

ऐसे बालक जो दृष्टि बाधित और श्रवण बाधित श्रेणी के अंतर्गत आते हैं उन्हें संस्था प्रमुख को अपना आवेदन पत्र आवश्यक प्रमाण पत्र यथा आय चिकित्सा और निवासी प्रमाण पत्र, संलग्न प्रस्तुत करना होता है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

संबंधित विद्यालय के संस्था प्रमुख को सीधे आवेदन भेजा जा सकता है।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र :

  • अधीक्षक दृष्टि और श्रवण बाधितार्थ विद्यालय, घुई नर्सिंग होम करबला रोड, भोपाल
  • अधीक्षक दृष्टि और श्रवण बाधितार्थ विद्यालय, ग्राम पंडापुर;बाधराजध्द पो.ओ.लक्ष्मीपुरा सागर, म.प्र.
  • अधीक्षक दृष्टि और श्रवण बाधितार्थ विद्यालय, गणेश मंदिर होम शाला कुंठा नदी किनारे, खरगोन।

4.7 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

दृष्टिहीन बच्चे/छात्र

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

शासकीय दृष्टि बाधितार्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जबलपुर

योजना का संक्षिप्त विवरण

इस योजना का मुख्य उद्देश्य दृष्टिहीन छात्रों को प्राथमिक कक्षा से 12वीं तक शिक्षण और प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करना है। इस योजना के तहत प्रदेश के ऐसे सभी दृष्टि बाधित छात्र जो कक्षा 9 से 12 तक निरंतर अध्ययन करना चाहते हैं उनको शिक्षण प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। संस्था में 100 छात्रावासी और 50 दैनिक छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इस योजना में दृष्टिहीन छात्रों को संस्था के शिक्षण प्रशिक्षण देने के साथ ही छात्रावासी सुविधा नि:शुल्क भोजन, वस्त्र तथा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। दैनिक छात्रों को नि:शुल्क शिक्षण-प्रशिक्षण दिया जाता है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार।

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

सामाजिक न्याय विभाग।

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

विद्यालय में छात्रों की संख्या निर्धारित है ।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

मध्यप्रदेश के निवासी ऐसे सभी दृष्टिहीन छात्र जिनकी आयु 6 से 12 वर्ष के बीच है तथा जिनके माता-पिता की वार्षिक आय रुपये 12,000 से कम हो एवं उनका परिवार गरीबी रेखा के नीचे आते हों।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

ऐसे छात्र/छात्रा जो दृष्टि बाधित की श्रेणी के अंतर्गत आते है उन्हें प्रवेश के लिए संस्था प्रमुख को अपना आवेदन पत्र आवश्यक प्रमाण पत्र तथा आय, चिकित्सा और निवासी प्रमाण पत्र संलग्न कर प्रस्तुत करना होता है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

विद्यालय के प्राचार्य को सीधे आवेदन किया जा सकता है।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

नि:शक्ता प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : प्राचार्य दृष्टि बाधितार्थ माध्यमिक विद्यालय भेडाघाट रोड, जबलपुर, मध्यप्रदेश।


4.8 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

श्रवण बाधित बच्चे/छात्र

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

श्रवण बाधितार्थ संस्थाएँ (शासकीय विद्यालय रीवा, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन)

योजना का संक्षिप्त विवरण

इस योजना का उद्देश्य श्रवण बाधित छात्रों को विशेष तकनीकी उपकरणों के माध्यम से पूर्व प्राथमिक से कक्षा पाँचवीं तक शिक्षण और पूर्व व्यवसायिक प्रशिक्षण देना है। इसके तहत प्रदेश के श्रवण बाधित छात्र/छात्राओं को शिक्षण प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। प्रत्येक संस्था की छात्रावासी क्षमता 50 दैनिक छात्र निर्धारित है। इस योजना में छात्रों को नि:शुल्क शिक्षण सुविधा के साथ-साथ नि:शुल्क छात्रावासी सुविधा में भोजन, वस्त्र तथा चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध करायी जाती हैं।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

सामाजिक न्याय विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

विद्यालय में छात्रों की संख्या निर्धारित है ।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

ऐसे श्रवण बाधित बालक/बालिकाएँ जिनकी आयु 6 से 12 वर्ष के बीच हो। ऐसे श्रवण बाधित बालक/बालिकाएँ जिनके माता-पिता/अभिभावक की वार्षिक आय रुपये 12,000 से कम हो एवं गरीबी रेखा के नीचे आते हो।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

छात्र/छात्राओं को संस्था प्रमुख को अथवा आवेदन पत्र आवश्यक प्रमाण पत्रों के साथ प्रस्तुत करना होता है, जिसके आधार पर उनका चयन किया जाता है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

विद्यालय के प्राचार्य को सीधे आवेदन किया जा सकता है।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

नि:शक्ता प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र :

1. अधीक्षक, श्रवण बाधितार्थ विद्यालय मुरार, ग्वालियर, रीवा जबलपुर और उज्जैन म.प्र.

2. अधीक्षक श्रवण बाधित विद्यालय परेड ग्राउन्ड, लेबर वाला रोड, बिछिया रीवा।

3. अधीक्षक श्रवण बाधित विद्यालय भेडाघाट रोड, कोडवार, जबलपुर।


4.9 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

अस्थि बाधित शारीरिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति/छात्र

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

अस्थि बाधितार्थ संस्थाएँ, (शासकीय अपंग बाल गृह इन्दौर, बैतूल)

योजना का संक्षिप्त विवरण

इस योजना का उद्देश्य अस्ति बाधित विकलांग बच्चों को उपचार और कृत्रिम अंग/उपकरण देकर यथा संभव आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करना है। इस योजना में प्रदेश के सभी समूह के अस्थि बाधितार्थ को लाभान्वित किया जाता है। इन संस्थाओं में अपंग बालकों को उपचार के साथ ही पहली से आठवीं कक्षा तक शिक्षण और प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध करायी जाती है साथ ही नि:शुल्क आवास, भोजन, वस्त्र, बिस्तर, उपचार, शिक्षण प्रशिक्षण और कृत्रिम अंग/उपकरण उपलब्ध कराये जाते है। संस्थाएँ बैतूल और इन्दौर में संचालित है। प्रत्येक संस्था में 50 छात्रावासी बच्चों के लिए व्यवस्था है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

सामाजिक न्याय विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

विद्यालय में छात्रों की संख्या निर्धारित है ।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

ऐसे अस्थि बाधित बालक/बालिकाएँ जिनकी आयु 6 से 12 वर्ष के बीच हो। ऐसे अस्थि बाधित बालक/बालिकाएँ जिनके माता-पिता/अभिभावक की वार्षिक आय रुपये 12,000 से कम हो एवं गरीबी रेखा के नीचे आते हो।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

छात्र/छात्राओं को संस्था प्रमुख को आवेदन पत्र आवश्यक प्रमाण पत्रों के साथ प्रस्तुत करना होता है, जिसके आधार पर उनका चयन किया जाता है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

विद्यालय के प्राचार्य को सीधे आवेदन किया जा सकता है।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

नि:शक्ता प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र :

1.      अधीक्षक, अस्ति बाधितार्थ बाल गृह, नागपुर नाके के पास, सागर बाजार बैतूल, मध्यप्रदेश।

2.      अधीक्षक, अस्थि बाधितार्थ बाल गृह, पुराना काष्ठकला छात्रावास, परदेशीपुरा, इन्दौर


4.10 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

शारीरिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति जो अपने प्रयासों से आजीविका कमाने में असमर्थ है।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

राज्य अपंग कल्याण संस्थान, जबलपुर

योजना का संक्षिप्त विवरण

इस संस्थान का उद्देश्य अस्थि बाधित विकलांगों को उपचार, कृत्रिम अंग/उपकरण और व्यवसायिक प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाना है तथा उच्च शिक्षा में अध्ययनरत् दृष्टि बाधित छात्राेंं का छात्रावास संचालन करना है। संस्थान में मध्यप्रदेश में निवासरत् विकलांगों को प्रवेश दिया जाता है। उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी या विशेषज्ञों द्वारा सुझाये अनुसार कृत्रिम अंग उपकरण प्रदान किये जाते हैं। जबलपुर शहर के निवासी विकलांग दैनिक छात्र के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। संस्थान में प्रवेश देने की क्षमता 50 हैं। दोनों खण्ड में जबलपुर से बाहर के छात्रोें हेतु 50 हितग्राहियों के छात्रावास की व्यवस्था है। संस्था द्वारा अस्ति बाधितों/विकलांगों को विभिन्न व्यवसायिक प्रशिक्षण दिये जाते है। संस्था का संचालन राज्य शासन के सामाजिक न्याय विभाग द्वारा किया जाता है। संस्था का प्रमुख अधीक्षक होता है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

सामाजिक न्याय विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

संस्था में निर्धारित संख्या में ही प्रवेश दिया जाता है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

ऐसे अस्थि बाधित नि:शक्त जिनकी आयु 16 से 30 वर्ष के बीच हो और कम से कम पाँचवीं कक्षा तक उत्तीर्ण हो। ऐसे उच्च शिक्षा में नियमित रूप से अध्ययनरत् दृष्टिबाधित छात्र जिनकी अधिकतम आयु 30 वर्ष पूर्ण करने तक केवल छात्रावास में रहने की नि:शुल्क सुविधा प्रदान की जाती है। नि:शक्त जिनके माता-पिता/अभिभावक की वार्षिक आय रुपये 6000 से कम हो एवं गरीबी रेखा के नीचे आते हो, उन्हें छात्रावास सुविधा नि:शुल्क प्रदान की जाती है।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

संस्था प्रमुख को सीधे आवेदन दिया जा सकता है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

संस्था में प्रवेश के लिये व्यक्ति को निर्धारित आवेदन आवश्यक प्रमाण पत्रों, आय, निवास, विकलांगता प्रमाण पत्र के साथ प्रस्तुत करना होता है।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

नि:शक्ता प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : अधीक्षक राज्य अपंग कल्याण संस्थान संजीवनी नगर ग़ढा, जबलपुर, मध्यप्रदेश।


4.11 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

मानसिक रूप से अविकसित बच्चे, जो समाज के अन्य सामान्य बच्चों के साथ तारतम्य नहीं बना पाते हैं।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

मानसिक रूप से अविकसित बच्चों का गृह (इन्दौर, जबलपुर)

योजना का संक्षिप्त विवरण

इस संस्थान का उद्देश्य मंद बुध्दि बच्चों को उपचार और उन्हें प्रशिक्षण शिक्षण देकर यथा संभव आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने का प्रयास करना है। इसमें ऐसे मानसिक दृष्टि से अविकसित बच्चे जिनकी बौध्दिक क्षमता 50 से 75 बुध्दिलब्धि अंक हो उनको संस्था में शिक्षण प्रशिक्षण दिया जाता है। संस्था में 25 छात्रावासी रखने की क्षमता है। साथ ही दैनिक छात्र भी संस्था में लाभ उठा सकते हैं। वर्तमान में इन संस्थाओं में पूर्व प्राथमिक से 5 वीं कक्षा तक शिक्षण तथा सिलाई, क़ढाई, बुनाई आदि हस्तकला का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

सामाजिक न्याय विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

निर्धारित संख्या में ही प्रवेश दिया जाता है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

ऐसे मंद बुध्दि बालक/बालिकाएँ जिनकी आयु 6 से 12 वर्ष के बीच हो और जिनकी बौध्दिक क्षमता 50 से 75 बुध्दिलब्धि अंक हो तथा जिनके माता-पिता/अभिभावक की वार्षिक आय रुपये 12000 से कम हो एवं गरीबी रेखा के नीचे आते हों, उन्हें नि:शुल्क भोजन, वस्त्र चिकित्सा तथा छात्रावास की सुविधा उपलब्ध करायी जाती है।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

संस्था में प्रवेश के लिये अभिभावक संस्था प्रमुख को आवेदन पत्र प्रस्तुत करते हैं। आवेदन पत्र के साथ आवश्यक प्रमाण पत्र जैसे मूल निवास, आय और मानसिक दृष्टि से अविकसित होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना जरूरी है।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

संस्था प्रमुख को आवेदन पत्र दिया जाता है।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

नि:शक्ता प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र

1. अधीक्षक मानसिक दृष्टि से अविकसित बच्चों का गृह समाज कल्याण कॉम्पलेक्स परदेशीपुरा, इन्दौर मध्यप्रदेश।

2. अधीक्षक मानसिक दृष्टि से अविकसित बच्चों का इंदिरा गांधी वार्ड डॉ. मुखर्जी नर्सिंग होम के सामने के.सी. रोड ग़ढा, जबलपुर म.प्र.।


वर्ग 5 - सामाजिक रूप से नि:शक्त

 

सामाजिक रूप से मुख्यधारा के कटे समाज के हिस्से को सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता है क्योंकि उनकी अपनी परिस्थिति में बड़े पैमाने पर बदलाव आ रहा है ऐसे में सबके साथ कदम से कदम मिला कर चलने के लिए उन्हें समाज व सरकार को सहयोग देना है। ऐसे आदिम जाति व अनुसूचित जाति के समाज के लिए कुछ मात्रा में सरकारी प्रयास है जिनका लाभ उन तक पहुँचाने में हम मदद कर सकते है।

5.1 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

समाजिक रूप से सबसे निचले पायदान पर खड़े जरूरतमंद अनुसूचित जाति/आदिवासी परिवारों जो अपनी निर्धनता एवं असहाय अवस्था के कारण संकटापन्न स्थिति में है और जिन्हें अपनी जरूरत पूरी करने के लिये शासन की किसी योजना से अथवा अन्य किसी स्रोत से तुरंत आर्थिक सहायता मिलने की संभावना नहीं है।

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति राहत योजना नियम, 1979 (यथा संशोधित)

योजना का संक्षिप्त विवरण

अनुसूचित जाति आदिवासी राहत योजना का उद्देश्य, ऐसे जरूरतमंद अनुसूचित जाति/आदिवासियों अथवा अनुसूचित जन जाति/आदिवासी परिवारों को तुरंत राहत पहुँचाना है, जो अपनी निर्धनता एवं असहाय अवस्था के कारण संकटापन्न स्थिति में है और जिन्हें तत्संबंधी जरूरत पूरी करने के लिये शासन की किसी योजना से अथवा अन्य किसी स्रोत से तुरंत आर्थिक सहायता मिलने की संभावना न हो, चूँकि शासन का उद्देश्य अनुसूचित जाति/आदिवासियों को संरक्षण प्रदान करना है इसलिये यह योजना लागू की जा रही है। किसी भी प्रार्थी को यह राहत उसी परिस्थिति में स्वीकृत की जायेगी जब स्वीकृतिकर्ता प्राधिकारी को यह विश्वास हो जायेगा कि प्रकरण में राहत स्वीकृत करना नितांत आवश्यक है और प्रार्थी को ऐसा कोई दूसरा वित्तीय स्त्रोत अथवा आश्रयदाता उपलब्ध नहीं है, जिससे कि उसे संकटापन्न स्थिति में तुरंत आर्थिक सहायता प्राप्त हो सके। इस योजना के तहत प्रकरणों को तीन श्रेणी में बाँटा गया है जिसमें 2 लाख से 200 रुपये तक की राहत दी जा सकती है। (योजना की विस्तार से जानकारी के लिए कृपया प्रारूप-दस डाउनलोड करें)

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

लक्ष्य निर्धारित नहीं है जितने प्रकरण आएँगे, उन सब में राहत की कार्यवाही की जानी है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

इस योजनांतर्गत अनुसूचित जाति, जनजाति के निम्नांकित सदस्यों/परिवारों को राहत प्राप्त करने की पात्रता रहेगी:-

  • सवर्ण वर्ग द्वारा उत्पीड़न के कारण शारीरिक या संपत्तिक अथवा दोनों प्रकार की हानि उठाने वाले अनुसूचित जाति/आदिवासी व्यक्ति अथवा अनुसूचित जाति/आदिवासी परिवार।
  • विवाह योग्य अनाथ अनुसूचित जाति कन्या के विवाह के लिये।
  • ऐसा आर्थिक रूप से विपन्न परिवार जिसकी आर्थिक दशा इतनी कमज़ोर हो कि जो अपनी कन्या के विवाह के लिये न्यूनतम साधन नहीं जुटा पा रहा हो।
  • अपाहिज, अंधे जो कि जीविकोपार्जन में असमर्थ हैं तथा निराश्रित वृध्द और ऐसा बीमार जिसकी देखभाल करने वाला कोई न हो।
  • ऐसा व्यक्ति जो कि रोजनदारी, खेतिहर मज़दूरी अथवा कोई छोटा धंधा रोजगार करता था और जो किसी दुर्घटना अथवा दैवी प्रकोप के कारण लम्बे समय के लिये काम करने में असमर्थ हो गया हो तथा उसके परिवार की आजीविका का दूसरा कोई साधन न हो।
  • एक ही परिवार को एक से अधिक स्त्रोत से सहायता प्राप्त करने की पात्रता नहीं रहेगी।
  • ऐसा परिवार, जिसके एक मात्र मुखिया का निधन हो गया हो और परिवार के भरण पोषण की तत्काल कोई व्यवस्था न हो पा रही हो।
  • सवर्ण पुरुष द्वारा बलात्कार के शिकार अनुसूचित जाति/आदिवासी महिला और यदि बलात्कार के परिणाम स्वरूप महिला की मृत्यु हो जाये तो उक्त महिला के पति अथवा उसके उत्तराधिकारी को भी राहत पाने की पात्रता होगी।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

योजना के अंतर्गत राहत प्राप्त करने के लिये जरूरतमंद अनुसूचित जाति/आदिवासी प्रार्थी अपना पूरा नाम, पूरा पता, जाति लिखेगा और स्पष्ट रूप से यह बतायेगा कि उसे राहत की क्यों आवश्यकता है। उसके आवेदन पत्र पर ग्राम पंचायत के सरपंच, जनपद/अध्यक्ष/नगर निगम/नगरपालिका परिषद् ग्राम सेवक/मंडल संयोजक/क्षेत्रीय विधायक/संसद सदस्य में से किसी एक के द्वारा यह तस्दीक होना आवश्यक है कि प्रार्थी अनुसूचित जाति/आदिवासी समुदाय का सदस्य है और उस आवेदन पत्र में उल्लेखित प्रयोजन के लिये राहत की तुरंत आवश्यकता है। उत्पीड़न एवं बलात्कार संबंधी प्रकरणों में संबंधित पुलिस थाने से तसदीक कराना होगी। इस योजना के तहत जिन प्रकरणों में राहत स्वीकृत करने के लिए विकास खण्ड अधिकारी प्राधिकृत है, उससे संबंधित आवेदन पत्र का परीक्षण विकास खण्ड अधिकारी द्वारा ही कराया जाएगा। जिन प्रकरणों में राहत स्वीकृत कलेक्टर द्वारा की जानी है उससे संबंधित आवेदन पत्रों को विकास खण्ड अधिकारी अपनी अनुशंसा के साथ सहायक आयुक्त/जिला संयोजक को प्रेषित करेगा।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

योजना के अनर््तगत राहत प्राप्त करने के लिए प्रार्थी को अपना आवेदन विकास खण्ड कार्यालय अथवा कलेक्टर के कार्यालय में लिखित में पहुँचाना होगा।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

जाति प्रमाण पत्र, अपराध के मामले में थाने में दर्ज प्राथमिकी की कॉपी।

अन्य विवरण

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : ब्लॉक कार्यालय, कलेक्ट्रेट, सहायक आयुक्त/जिला संयोजक आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग।


5.2 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

अनुसूचित जाति/जनजाति के बेरोजगार युवक

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

रानी दुर्गावती अनुसूचित जाति/जनजाति स्वरोजगार योजना

योजना का संक्षिप्त विवरण

राज्य शासन अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के व्यक्तियों के लिये विभिन्न विकास योजनाओं के माध्यम से उत्थान करने के लिये कृत संकल्पित है। इस अनुक्रम में भोपाल घोषणा पत्र में उल्लेखित महत्वपूर्ण अनुशंसा जो कि अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के व्यक्तियों को सफल उद्यमियों के रूप में विकसित करने से संबंधित है को वास्तविक रूप प्रदान करने के लिये इस वर्ग के व्यक्तियों को स्वरोजगार में स्थापित करने के लिये रानी दुर्गावती स्वरोजगार योजना चलाई जा रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम 5000 हितग्राहियों जो कि शिक्षित बेरोजगार वर्ग के हैं को स्वरोजगार के माध्यम से उद्यमी के रूप में विकसित कर अपने उद्योग सेवा एवं व्यवसाय को स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत पात्र हितग्राही को स्वयं का उद्योग सेवा एवं व्यवसाय प्रारंभ करने के लिये वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऋण प्रदान किया जाता है। हितग्राहियों को व्यवसाय में स्थापित होने के लिये स्वयं मार्जिन मनी लगाना पड़ती है। यदि वह यह राशि लगाने में असमर्थ होते हैं, उस स्थिति में उन्हें मार्जिन मनी के रूप में सहायता प्रदान की जाती हैं मार्जिन मनी की अधिकतम सीमा प्रोजेक्ट का 33 प्रतिशत तक है जो प्रदान की जाती हैं।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

राज्य सरकार

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

उद्योग विभाग

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

आगामी पाँच वर्षों में 25000 अनुसूचित जाति/जनजाति के उम्मीदवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।

योजना के तहत पात्र हितग्राही

इस योजना के अंतर्गत राज्य के अनुसूचित जाति/जनजाति के हितग्राही पात्र होंगे। साथ ही वे मध्यप्रदेश के मूल निवासी हो। अनुसूचित जाति/जनजाति का हो (राज्स्व अनुभाग स्तर के अधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र हो) जिनकी उम्र 18 से 50 वर्ष हो। किसी शासकीय मान्यता प्राप्त विद्यालय से कम से कम 8वीं कक्षा उत्तीर्ण हो। इस योजना के तहत निम्न श्रेणी के आवेदकों को प्राथमिकता रहेंगी अ. राज्य शासन का बेरोजगारी भत्ता प्राप्त आवेदक। ब. तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग की बहुउद्देश्यी इंजीनियर योजनांतर्गत प्रशिक्षित व्यक्ति ।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

आवेदकों का प्रथम आओ प्रथम पाओ के आधार पर चयन किया जाता है। सभी आवेदक सूचीबध्द किये जाएँगे। आवेदकों का चयन जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स समिति द्वारा साक्षात्कार के माध्यम से किया जायेगा। इस समिति के सदस्य निम्नानुसार होंगे। महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र- अध्यक्ष, जिला रोजगार अधिकारी- सदस्य जिला अग्रणी बैंक के प्रतिनिधि-सदस्य, बैंकों के प्रतिनिधि- सदस्य, आदिवासी वित्त विकास निगम के जिला प्रतिनिधि-सदस्य, म.प्र. राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के जिला प्रतिनिधि-सदस्य। जिला समन्वय उद्यमिता विकास केंद्र-सदस्य। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी-सदस्य, परियोजना अधिकारी, जिला शहरी विकास अभिकरण-सदस्य, प्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र सदस्य।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर अथवा मैदानी अधिकारियों द्वारा प्रचार-प्रसार करवाकर जिला उद्योग केंद्र में निर्धारित प्रारूप पत्र आमंत्रित किये जाते हैं। टास्क फोर्स समिति द्वारा अनुशंसित आवेदक के मूल प्रकरण संबंधित क्षेत्र के बैंक/वित्तीय संस्था को भेजे जाते हैं स्वीकृत प्रकरणों के आवेदकों को 30 दिवस का प्रशिक्षण दिया जाता हैं। इसके बाद बैंक ऋण वितरित करती है। स्थापित इकाइयों का निरीक्षण कार्ड संधारित किया जाता है और आवश्यक सहायता व मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

मध्यप्रदेश के मूल निवासी प्रमाण पत्र, अनुसूचित जाति/जनजाति का प्रमाण पत्र जो राजस्व अनुभाग स्तर के अधिकारी द्वारा प्रदान किया गया हो। किसी शासकीय मान्यता प्राप्त विद्यालय से कम से कम 8 वीं कक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण पत्र।

अन्य विवरण

हितग्राहियों द्वारा समय पर बैंक की औपचारिकताएँ पूर्ण न करना क्रियान्वयन में मुख्य बाधा है। इससे प्रकरणों में अनावश्यक विलंब होता है। ज्यादातर युवक-युवतियाँ शासकीय सेवा में जाने के इच्छुक होते हैं। इसके बाधा निवारण के तहत जिले में जिलाध्यक्ष की अध्यक्षता में मॉनीटरिंग कमेटी गठित है, जो कठिनाइयों का निराकरण किया जाता है।

योजना का लाभ लेने के लिए संपर्क सूत्र : राज्य स्तर पर संचालक, लघु उद्योगों म.प्र. जिला स्तर पर महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र है।


वर्ग 6 - अत्यधिक गरीब/बेसहारा

6.1 सामाजिक सुरक्षा हेतु पात्र परिवार/व्यक्ति वर्ग का विवरण

अत्यधिक कुपोषण के शिकार बच्चे

संबंधित वर्ग के परिवार/व्यक्ति के कल्याण/सामाजिक सुरक्षा हेतु शासन की योजना

बाल संजीवनी अभियान व बाल शक्ति योजना

योजना का संक्षिप्त विवरण

प्रदेश में बच्चों के बीच कुपोषण की स्थिति राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। इसको कम करने के लिए बाल संजीवनी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के प्रत्येक चरण में चिन्हित ग्रेड 4 के कभी ग्रेड 3 के गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को आवश्यक चिकित्सा सेवा प्रदान की जायेगी। समस्त चिन्हित कुपोषित बच्चों के परिजनों को पोषण आहार का महत्व समझाते हुए कम लागत वाला एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से निर्मित पौष्टिक आहार तैयार करने का प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा।

1. जाँच शिविर- चिकित्सकीय उपचार हेतु बच्चों के चयन के लिए एक दिवसीय खण्ड जाँच शिविर आयोजित किये जाएँगे। इस शिविर में 2 शिशु रोग विशेषज्ञ अनिवार्यत: होंगे। शिशु रोग विशेषज्ञों को सेवाएँ ली जा सकेंगी। खण्ड स्तरीत जाँच शिविर में ग्रेड 3 एवं ग्रेड 4 के सभी बच्चों को लाने की जिम्मेदारी प्रमुख रूप से ऑंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका एवं पर्यवेक्षक की होगी यह कार्य एकीकृत बाल विकास परियोजना के परियोजना अधिकारी द्वारा सुनिश्चित किया जायेगा और स्वास्थ्य विभाग का अमला भी सहयोग करेगा। शिविर में मुख्य रूप से बच्चों की जाँच, दवा वितरण, बच्चों के परिजनों को आवश्यक परामर्श एवं योजना के प्रचार-प्रसार आदि गतिविधियाँ की जाएँगी। उपचार हेतु चयनित बच्चों के परिजनों को योजना के लाभ से अवगत कराते हुए उनकी शंकाओं का समाधान और बच्चों का उपचार कराने हेतु प्रेरित किया जायेगा योजना के अंतर्गत कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त पोषण आहार सभी ऑंगनवाडियों के माध्यम से दिया जायेगा।

2. पोषण पुनर्वास प्रशिक्षण- उन सभी बच्चों, जिन्हें जाँच शिविर के दौरान अस्पताल में भर्ती कर उपचार की आवश्यकता नहीं समझी गई है, उनके परिवार से किसी एक व्यक्ति-विशेषकर माताओं को सेक्टर स्तर पर एक दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा जिसमें ऑंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी भाग लेंगी। यह प्रशिक्षण कुपोषित बच्चों की उचित देखभाल एवं स्थानीय सामग्री से कम लागत वाले पौष्टिक आहार तैयार करने की विधियों पर केंद्रित होगा।

3. संस्थागत उपचार एवं पोषण पुनर्वास- संस्थागत उपचार हेतु चयनित कुपोषित बच्चों को अस्पताल में 7 से 14 दिवस तक भर्ती कर उपचार प्रदान किया जायेगा। यह उपचार शिशु रोग विशेषज्ञ की देखरेख में किया जायेगा। उपचार की इस अवधि में बच्चाें के साथ उनकी माताओं को अस्पताल में रुकना अनिवार्य होगा, जिन्हें इस दौरान कम लागत वाला पोष्टिक आहार तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जायेगा। कुपोषित बच्चों को अस्पताल तक जाने के परिवहन व्यय की प्रतिपूर्ति के रूप में रू. 100 प्रति बच्चा भर्ती के समय अस्पताल प्रभारी द्वारा बच्चे की माता को दिया जाएगा। शासकीय चिकित्सालय में दैनिक भोजन व्यवस्था हेतु योजना अंतर्गत प्रति कुपोषित बच्चा राशि रुपये 50 प्रतिदिन के मान से प्रदान की जायेगी। इस राशि में से रुपये 15 का उपयोग बच्चों के भोजन हेतु तथा रुपये 35 बच्चे की माता को भोजन आदि व्यय के लिए नगद दी जायेगी।

योजना का वित्तीय स्त्रोत (केंद्र प्रवर्तित/राज्य/बाह्य वित्त पोषित)

केंद्र सरकार, राज्य सरकार, यूनिसेफ

विभाग जिसके तहत योजना संचालित की जाती है

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

योजना के तहत वार्षिक लक्ष्य (यदि हों तो)

नहीं

योजना के तहत पात्र हितग्राही

श्रेणी 3 व 4 के कुपोषित बच्चे।

योजना के तहत हितग्राही के चयन के मापदंड/प्रक्रिया

एक दिवसीय खण्ड जाँच शिविर आयोजित किये जाएँगे। इस शिविर में 2 शिशु रोग विशेषज्ञ अनिवार्यत: होंगे। शिशु रोग विशेषज्ञों को सेवाएँ ली जा सकेंगी। खण्ड स्तरीत जाँच शिविर में ग्रेड 3 एवं ग्रेड 4 के सभी बच्चों को लाने की जिम्मेदारी प्रमुख रूप से ऑंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका एवं पर्यवेक्षक की होगी यह कार्य एकीकृत बाल विकास परियोजना के परियोजना अधिकारी द्वारा सुनिश्चित किया जायेगा और स्वास्थ्य विभाग का अमला भी सहयोग करेगा। शिविर में मुख्य रूप से बच्चों की जाँच, दवा वितरण, बच्चों के परिजनों को आवश्यक परामर्श एवं योजना के प्रचार-प्रसार आदि गतिविधियाँ की जाएँगी। उपचार हेतु चयनित बच्चों के परिजनों को योजना के लाभ से अवगत कराते हुए उनकी शंकाओं का समाधान और बच्चों का उपचार कराने हेतु प्रेरित किया जायेगा।

योजना के तहत हितग्राही द्वारा लाभ लेने हेतु आवेदन देने की प्रक्रिया (किसे/कहाँ देना होता है)

आवेदन की आवश्यकता नहीं है शिविर के माध्यम से ही बच्चों का चिन्हांकन किया जाएगा।

योजना के तहत लाभ लेने हेतु किन प्रपत्रों/जानकारी/दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक है

दस्तावेज आवश्यक नहीं है।

अन्य विवरण