मध्यप्रदेश
ग्रामीण
आजीविका
परियोजना
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनतम परिवारों की आर्थिक समृध्दि के लिये प्रतिबध्द है ताकि वे गरिमापूर्ण जीवन जी सकें। परियोजना का उद्देश्य आदिवासी बहुल जिलों के
दूरस्थ गांवों के ऐसे गरीब परिवारों को आजीविका के बेहतर साधन, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराना है जिनके पास या तो बहुत कम संसाधन हैं या जो संसाधन विहीन हैं।
गरीब आदिवासी परिवारों की संसाधनों, बाजार, जानकारी, सेवाओं और आर्थिक उन्नति के अवसरों तक आसान पहुंच बनाने के लिये ग्रामीण आजीविका परियोजना विभिन्न गतिविधियां संचालित कर रही है। परियोजना की सोच है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों को गुणवत्तापूर्ण जीवन के लिये ऐसे संसाधन मिलें जिससे उनकी आय निरंतर रूप से बढ़ती रहे। ऐसे अवसर या संसाधन व्यक्तिगत रूप से या सामुदायिक आधार पर भी निर्मित हो सकते हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये आजीविका परियोजना ने स्थानीय संसाधनों और अवसरों की उपलब्धता के आधार पर द्विस्तरीय रणनीतियां बनाई हैं। प्रथमतः गांवों में उपलब्ध ऐसे संसाधनों के आधार को मजबूत करना जिससे आजीविका के बेहतर अवसर निर्मित होते हैं। इसके अलावा ऐसे लघु उद्यमों को बढ़ावा देना जिनसे गरीबों को रोजगार तथा आमदनी के अवसर प्राप्त होते हों।
ग्राम सभा परियोजना के क्रियान्वयन का केन्द्र बिन्दु है। आजीविका संबंधी गतिविधियों का अनुमोदन ग्राम सभा द्वारा होता है। ग्राम सभा एक संवैधानिक संस्था है। विकास प्रक्रिया, नियोजन और क्रियान्वयन में ग्राम सभा का मत सर्वोच्च है। ग्राम सभा के सदस्यों के विवेक को सम्मान देते हुए आजीविका
परियोजना ग्राम सभा की सहायक और मार्गदर्शी संस्था की भूमिका में ग्राम सभा को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी निभा रही है।
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