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राज्य स्तर जिला स्तर
ग्राम स्तर आजीविका मित्र
धनराशि का प्रवाह    

योजनाओं तथा प्रयासों के एकीकरण पर अत्यधिक बल दिया गया है। इनमें पंचायत राज संस्थाएँ, सामाजिक संगठन, शासकीय एजेंसियाँ तथा ग्रामीणों के सभी संगठन और उनकी गतिविधियाँ शामिल हैं। ठोस और सतत रूप से लोगों की आजीविका के विस्तार के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के निर्माण, क्रियान्वयन, मॉनीटरिंग आदि कार्यों में लोगों, उनके समूहों, सामाजिक संगठनों तथा गैर-शासकीय संगठनों की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया गया है।

परियोजना के तहत किये जाने वाले कार्यों में एक-दूसरे से सीखने तथा अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए जिला और राज्य स्तर पर संस्थागत व्यवस्थाएं की गई है। लोगों की आजीविका संबंधी रुचि के अनुसार नवाचारों के साथ-साथ संसाधनों के एकीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।

राज्य स्तर

परियोजना के क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश सोसाइटीज अधिनियम के अंतर्गत मध्यप्रदेश सोसाइटी फॉर रूरल लाइवलीहुड्स प्रमोशन का पंजीयन किया गया है। इसके अध्यक्ष पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री हैं। राज्य स्तर पर कार्यपालिक दायित्वों के निर्वहन तथा परियोजना के तहत संचालित गतिविधियों की प्रगति की मॉनीटरिंग के लिए एक राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की गयी है। भोपाल स्थित इस इकाई के अध्यक्ष राज्य परियोजना समन्वयक हैं। राज्य परियोजना समन्वयक राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई का नेतृत्व करते हैं। इसमें एक छोटी टीम शामिल है, जिसका गठन राज्य स्तर पर अन्य शासकीय, गैर-शासकीय एजेन्सियों तथा संस्थाओं के साथ प्रत्येक दृष्टिकोण से संपर्क स्थापित करने के लिए किया गया है। राज्य स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई में एक कोर टीम है जो निम्न क्षेत्रों में कार्य के लिए उत्तरदायी है:

  • कृषि और जलग्रहण विकास
  • पशुपालन
  • मानव संसाधन
  • वित्त
  • महिला अधिकार और समानता तथा सामाजिक विकास
  • समाजिक सुरक्षा
  • सूचना एवं संचार
  • लघु उद्यम विकास
  • लघु वित्त
  • मॉनीटरिंग, सीख प्राप्त करना तथा मूल्यांकन
  • प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

परियोजना को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन में मार्गदर्शन देने के लिए प्रमुख सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास की अध्यक्षता में सोसाइटी की कार्यकारी समिति का गठन किया गया है।

ग्राम और जिला स्तर पर कार्य और अनुभव के बीच समन्वय के लिए राज्य स्तर पर एक राज्य लर्निंग फोरम स्थापित है। यह राज्य स्तर पर नीति और कार्यक्रमों के बीच तालमेल भी स्थापित करेगा। एक संचालन समूह है जिसके सदस्य सचिव परियोजना समन्वयक हैं । लर्निंग फोरम राज्य में ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम के अनुभवों का मूल्यांकन और विश्लेषण करायेगा और नीति, संस्थागत व्यवस्था और विनियमन व्यवस्था में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए उपयुक्त कार्यवाही का सुझाव देगा। परियोजना के तहत राज्य सरकार को विभिन्न रोजगार योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग, ग्रामीण परिसम्पति निर्माण तथा स्व-रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायता दी जायेगी।

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जिला स्तर

जिला परियोजना के क्रियान्वयन का प्रमुख स्तर जिला है। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक परियोजना प्रबंधन समिति है, जिसमें जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी और वन, कृषि, आदिम जाति कल्याण, उद्योग विभागों के जिला प्रमुख, अग्रणी बैंक प्रबंधक, समायोजित विशेषज्ञ तथा परियोजना क्षेत्र के विधायक शामिल हैं। यह समिति समय-समय पर मार्गदर्शन देती है और जिला पंचायत परियोजना के समन्वय तथा मॉनीटरिंग के लिए उत्तरदायी है।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, परियोजना प्रबंधन समिति के सदस्य सचिव हैं और जिले के परियोजना समन्वयक परियोजना के क्रियान्वयन में समिति का मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। इससे परियोजना का प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने में मदद मिलती है, क्योंकि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिले में विकास कार्यक्रमों तथा योजनाओं के प्रभारी होते हैं। समिति द्वारा संसाधनों तथा प्रयासों को समन्वित तरीके से उपयोग में लाने की पहल की जाती है।

जिला स्तरीय सहायता इकाई, मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पर्यवेक्षण में कार्य करती है। जिले में परियोजना के संचालन से संबंधित कार्यों के लिए यह इकाई मुख्य संसाधन केंद्र है।

जिला स्तर पर संस्थागत विकास के लिए प्रक्रिया कार्यविधि अपनाई जाएगी। जिले में और बाहर उपलब्ध संसाधनों और कौशलों व्यवस्थाओं का विस्तृत और सुव्यवस्थित विवरण तैयार करके यह पता लगाया जाएगा कि प्रारंभिक सहयोग कहाँ से मिल सकता है। इससे संसाधनों के एकीकरण तथा गरीबों को आजीविका के अधिक साधन उपलब्ध कराने में आवश्यक मदद मिलेगी।

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ग्राम स्तर

ग्राम विकास समिति, सामुदायिक समूहों तथा आजीविका मित्रों को लघु स्तरीय नियोजन, तकनीकी सहयोग प्राप्त करने तथा क्षमता निर्माण के लिए आवश्यकताओं की पहचान करने में मदद के लिए ग्राम समूह स्तर पर एक बहु-आयामी परियोजना सहायता दल का गठन किया गया है । यह दल सामुदायिक समूहों तथा समितियों के प्रस्ताव तैयार करने, क्षमता निर्माण करने तथा सर्वाधिक उपयुक्त स्रोत से तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त करने में सहायता करता है । जिला परियोजना सहयोग इकाई यह सुनिश्चित करती है कि परियोजना सहयोग दल को समाज का आवश्यक सहयोग मिले और लघु उद्यम कौशलों का यह लाभ ले सकें। इस लक्ष्य की पूर्ति प्रशिक्षण#प्रत्यक्ष अनुभव के समन्वय तथा अतिरिक्त आजीविका संबंधित कौशलों का परियोजना सहयोग दलों से संपर्क कराकर की जाएगी।

यह दल आजीविका मित्रों के कार्य में मदद करना है तथा क्षमता निर्माण, जागरुकता बढ़ाने और सामूहिक कार्य के लिए लोगों को संगठित करने में सक्रिय भूमिका का निर्वाह करता है । यह ग्रामीणों को अपनी विकास योजनाओं के निर्माण में भी मदद करना है और उनके लिए सब तरह के संपर्क स्थापित करना है। इनमें उन्नत बीज और खाद की व्यवस्था के साथ-साथ बाजार से बेहतर संपर्क स्थापित करना भी शामिल हैं। प्रत्येक परियोजना सहयोग दल लगभग दस गाँवों के समूह में आवश्यक गतिविधियों के संचालन में सहयोग देना है। हालाँकि जो गैर-शासकीय संगठन परियोजना दल के रूप में कार्य करते है उन्हें जिला स्तर पर स्थापित परियोजना इकाई से भुगतान किया जाएगा, वहीं लक्षित गाँवों में सभी विकास गतिविधियों का वित्त पोषण ग्राम सभा के ग्रामकोष के खाते से होता है।

परियोजना के अंतर्गत, पूर्व में अथवा वर्तमान में क्रियान्वित योजनायों - जलग्रहण प्रबंधन मिशन और संयुक्त वन प्रबंधन जैसे कार्यक्रमों से निर्मित ग्राम स्तरीय संस्थाओं तथा प्राकृतिक पूँजी को और विकसित किया जाएगा। इन संस्थाओं तथा ग्राम सभा के बीच जीवंत संपर्क स्थापित किया जाएगा ताकि विकास योजनाओं में समन्वय हो सके।

ग्राम स्तर की संस्थाओं तथा संबंधित समहित समूहों द्वारा लघु स्तरीय नियोजन किया जाएगा। इनका मुख्य उद्देश्य सबसे गरीब लोगों के लिए उपयुक्त आजीविका अवसरों की पहचान करना है। इससे ग्राम स्तर पर एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा तथा जहाँ भी संभव हो, वर्तमान योजनाओं से धनराशि प्राप्त की जा सकेगी।

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आजीविका मित्र

परियोजना के अंतर्गत, वानिकी, कृषि, पशुपालन लघु वित्त तथा लघु उद्यम के क्षेत्रों में ग्राम स्तरीय कार्यकताओं को ''आजीविका मित्र'' बनाकर गाँव में तथा गाँव के बाहर उनके बीच तालमेल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन ग्राम विशेषज्ञों को ग्राम सभा द्वारा नियोजित किया जाता है । चयनित आजीविका मित्रों को समुदाय का सहयोग जुटाने तथा अन्य कौशलों (भूमि और जल संरक्षण, फसल, पशुपालन तथा लघु स्तरीय नियोजन) में प्रशिक्षण दिया जाता है । आजीविका मित्रों को दिया जाने वाला प्रोत्साहन उनके कौशल पर निर्भर है ।

लघु-उद्यमों में क्षेत्र में आजीविका मित्र, प्रशिक्षण देने तथा समुचित गतिविधियों और संपर्कों की पहचान में मदद करने के कार्य में संलग्न विभिन्न जिला और राज्य स्तरीय एजेन्सियों के लिए स्थानीय स्तर पर सबसे प्रमुख स्रोत व्यक्ति है। नये लघु वित्त के क्षेत्र में स्व सहायता समूहो को आवश्यक जानकारी देने के लिये समूह प्रेरक भी बनाये गये हैं।

आजीविका मित्र के मुख्य कार्य हैं :-

  • समुदाय एवं समूह स्तरीय नियोजन, मॉनीटरिंग और क्रियान्वयन तथा लोगों को लक्षित करने की प्रक्रिया में सहयोग करना
  • लोगों को आजीविका संबंधी बेहतर जानकारी प्राप्त करने में सहयोग करना
  • बंधुता के आधार पर विभिन्न गतिविधियों पर केंद्रित समूहों तथा स्व-सहायता समूहों के गठन में मदद करना
  • ग्राम विकास समिति तथा समूहों को गैर-शासकीय संगठनों, निजी क्षेत्र तथा अग्रणी शासकीय विभागों सहित सेवा प्रदायकों से उपयुक्त विशेषज्ञता प्राप्त करने में मदद करना
  • समुदाय, क्रियान्वयन एजेन्सियों तथा बाजार के बीच संपर्क के रूप में कार्य करना
  • राज्य लर्निंग फोरम को परियोजना सहयोग दल तथा जिला परियोजना सहयोग इकाई के माध्यम से नई समझ और सीख से अवगत कराना
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धनराशि का प्रवाह

परियोजना के लिए धनराशि का प्रवाह राज्य से जिला पंचायत और जिला पंचायत से ग्राम कोष को होगा, जो चयनित मजरे-टोलों#गाँवों की ग्राम सभाओं के अधीन होता है। जलग्रहण संबंधी गतिविधियों के लिए धनराशि का प्रवाह ग्रामकोष से जलग्रहण समितियों को होगा, जो नियोजन तथा क्रियान्वयन के लिए होगा। जलग्रहण क्षेत्र के परियोजना सहयोग दल, चाहे वह शासकीय हों या गैर-शासकीय संगठन, इस प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। धनराशि के प्रवाह की यही व्यवस्था सामुदायिक वन प्रबंधन के लिए अपनाई जाएगी, जिसमें ग्रामसभा वर्तमान संयुक्त वन प्रबंधन समिति अथवा नई समिति को वानिकी संबंधी कार्य शुरू करने के लिए धनराशि प्रदान करेगी। इसी प्रकार, ग्राम कोष के पास भी लघु उद्योगों और अन्य आजीविका संबंधी गतिविधियों के लिए स्वसहायता समूहों तथा व्यक्तियों के प्रस्तावों के वित्त पोषण के लिए धनराशि उपलब्ध होगी।

ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के केंद्र में ग्रामसभा के संस्थापन से परियोजना तथा राज्य और केंद्र सरकार द्वारा निवेशित अन्य संसाधनों के संबंध में ऊपर से नीचे तक ग्राम सभा के प्रति जबाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी। इससे जिला निकायों तथा प्रमुख विभागों पर अधिक जबाबदेही के साथ कार्य करने का दबाव पडेगा।

परियोजना में अलग से नवाचार कोष है जिसका उपयोग आजीविका निर्माण के लिए जरूरी नवाचारी प्रस्तावों में सहयोग के लिए किया जाता है । विभिन्न स्तरों - राज्य, जिला एवं ग्राम स्तर पर क्षमता निर्माण, संस्था विकास तथा संबंधित गतिविधियों के लिए धनराशि रखी गई है। इससे अधिक प्रभावी भागीदारी के साथ नियोजन तथा बेहतर लक्ष्य निर्धारण में मदद मिलती है ।

परियोजना में विभिन्न गतिविधियाँ चलाने के लिए राज्य शासन से धनराशि प्राप्त होती है, जिसकी प्रतिपूर्ति डीएफआईडी द्वारा भारत शासन के माध्यम से की जाती है ।

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वेबसाइट पर प्रदर्शित सामग्री, संधारण,
मध्यप्रदेश सोसायटी फॉर रूरल लाइवलीहुड प्रोमोशन द्वारा
आकल्पन, संधारण MPRLP