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हारने नहीं दिया मुकेश को

दुर्घटना में अपना पैर गवा चुका नौजवान मुकेश जीवन संघर्ष से थककर चूर हो गया था। अपाहिज होते हुए अपने बूढ़े माता पिता का बोझ कैसे उठायेगा इसी चिंता में वह घुल रहा था। धार जिले के बदनावरMPRLP क्लस्टर में बामनसुता गाँव का रहने वाला 23 वर्षीय मुकेश का एक दिन थ्रेशर मशीन में मजदूरी का कार्य करते समय बाया पैर मशीन में आ गया। खेत मालिक द्वारा इलाज कराने के बावजूद पैर का घाव ठीक नहीं हुआ। डाक्टर की सलाह से घुटने के ऊपर से पैर काटना पड़ा। अपने बूढ़े माता पिता के पालन पोषण की जिम्मेदारी पूरा करने के लिये मुकेश ने अपने स्वयं के प्रयास से जयपुर से नकली पैर भी लगा लिया। अब रोजी-रोटी की समस्या उसके सामने थी।

परियोजना सहायता दल ने मुकेश से चर्चा की और उसे कुछ धंधा शुरू करने के लिये प्रोत्साहित किया। नैतिक रूप से परियोजना का साथ पाकर उसने अपना काम शुरू करने का साहस दिखाया। ग्रामसभा में मुकेश का प्रस्ताव अनुमोदित हुआ। तीन हजार रुपये की ऋण राशि से मुकेश ने बदनावर चौपाटी पर किराये का ठेला लेकर मौसमी फल व्यवसाय प्रारम्भ किया। अब मुकेश का फल व्यवसाय अच्छा चल रहा है। वह प्रतिदिन 60 से 80 रुपये कमा लेता है। एवं ऋण की किश्त 250 रुपये प्रतिमाह चुका रहा है। अब तक दो किश्तें जमा कर चुका है। अब मुकेश अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है।