मुख्यपृष्ठ | लाँगिन | ई-मेल | सम्पर्क करें | अंग्रेजी
MPRLP
कार्यक्षेत्र
कार्यप्रणाली
कैसे जुड़ें
परियोजना
संगठन
परियोजना दस्तावेज
प्रगति
बदलाव की कहानियाँ
फोटो दीर्घा
सूचना का अधिकार
एफ ए क्यूस
निविदाँए
समाचार
आयोजन
महत्वपूर्ण लिंक्स
MPRLPएफ ए क्यूस

 

उत्तर: मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका परियोजना, इंटरनेशनल डेवलपमेंट, ब्रिटेन के लिए विभाग द्वारा वित्त पोषित है जिसका उद्देश्य सतत आजीविका को बढ़ावा देकर ग्रामीण गरीबी को कम करना है। परियोजना सुदूर अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में विशेष रूप से गरीब ग्रामीण परिवारों को प्रोत्साहित कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास करता है।
उत्तर: परियोजना ग्रामीण लोगों और उनके जन्मजात गरीबी के चक्र को तोड़ने की क्षमता के ज्ञान में विश्वास रखता है तथा स्थानीय समुदायों को सतत प्रोत्साहित कर उनकी आजीविका में सुधार, और इस प्रकार से गरीबी कम करने के उपायों को ढूंढ निकालते है। एक सुविधा के रूप में, परियोजना ग्रामीण लोगों को प्रेरित करने के लिए अपने स्वयं के अनुभवों के अंतर्दृष्टि और व्यक्तिक रूप का प्रयोग करती है।
उत्तर: परियोजना धार, झाबुआ, बड़वानी, अनूपपुर, शहडोल, मंडला, डिंडोरी और श्योपुर जिलों के आदिवासी क्षेत्रों में, विशेष रूप से काम करती है। जुलाई 2007 से शुरू द्वितीय चरण, में प्रथम चरण के 822 गांवों सहित लगभग 4,000 गांवों में परियोजना की गतिविधियां चल रहीं हैं।
उत्तर: आजीविका परियोजना ग्राम सभाओं के माध्यम से काम करता है प्रत्येक गांव में एक ग्राम सभा और प्रत्येक ग्राम सभा की एक गांव निधि है। परियोजना फंड सीधे ग्राम निधि को प्रदान करती है जो ग्राम सभा द्वारा संचालित होते हैं। ग्राम सभा गांव में धन का उपयोग स्थायी आजीविका के साधनों को सुनियोजित करने में करती है।
उत्तर: ग्राम सभा जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की आधारशिला हैं. ग्राम सभा एक साथ 18 वर्ष से अधिक उम्र के ग्रामीणों को बहस और अपनी चिंताओं को साझा करने का आधार प्रदान करती है। ग्राम सभा गांव संसद हैं और उसे संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। ग्राम सभा आजीविका के मुद्दों की जानकारी के माध्यम से योजना के लिए की समझ को विकसित करने, भागीदारी के महत्वपूर्ण मुद्दों और तरीकों का उपयोग करने के लिए रणनीतियों का निर्माण करती है और सहभागितापूर्ण प्रयासों से ग्रामीण के जीवन में आवश्यक परिवर्तनों को करने का सूत्रपात कर ग्राम सभा की क्षमता निर्माण करना आजीविका परियोजना के लिए एक सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उत्तर: राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई ( SPMU ) द्वारा जिला परियोजना समर्थन इकाइयों ( DPSU ) का प्रबन्धन और मार्गदर्शन किया जाता है। राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई परियोजना समन्वयक के नेतृत्व में कार्य करती है। जिला परियोजना इकाइयां परियोजना सहायता दल को कुशल कर्मचारियों के साथ सहयोग प्रदान करती है। तकनीकी सहयोग, परियोजना समर्थन यूनिट (टीसी पीएसयू) परियोजना को तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
उत्तर: परियोजना का द्वितीय चरण जुलाई 2007 में शुरू किया गया और 2012 तक चलेगा। प्रथम चरण 1 जून 2004 से शुरू होकर जून 2007 तक चला। प्रथम चरण के दौरान. 114.9 करोड़ या 16.49 मिलियन पाउण्ड आजीविका की गतिविधियों को बढ़ावा देने पर खर्च किया गया था। द्वितीय चरण में रुपए 357 करोड़ या 45 लाख पाउंड पांच वर्षों में खर्च किया जाएगा।
उत्तर: आजीविका परियोजना की पांच मुख्य विशेषताएं है. सबसे पहले, परियोजना मध्य प्रदेश के नौ जिलों ग्राम सभा के माध्यम से फण्ड का निर्गमन गरीब और कमजोर ग्रामीणों को देकर उनके जीवन में सुधार गतिविधियों के लिए अनुमार्गण किया जाता है। दूसरा परियोजना आजीविका के नये साधनों की पहचान और उसका परीक्षण किया जाता है ताकि विभिन्न योजनाओं का लाभ उन्हे मिल सके। तीसरा परियोजना विशेष रूप से महिलाओं के जीवन में सुधार लाने के साथ उनकी सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को व्यापक बनाने के विशेष प्रयास किये जाते हैं। चौथी विशेषता के रूप में परियोजना ग्राम सभा की क्षमता को मजबूत कर संसाधनों का प्रबंधन और धन का समान वितरण सुनिश्चित करना रहा है। और अंतत: गरीब और कमजोर के हितों को बढ़ावा देना जिससे वे अपनी आजीविका सुनिश्चित कर सकें।
उत्तर: आजीविक परियोजना पाँच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है. सबसे पहले, गरीबी से ग्रस्त इलाकों में नीतिगत विकास, दूसरा उद्यमशीलता का विकास, तीसरे, जरूरतमंदों का समर्थन, चौथे गरीब ग्रामीणों का रणनीतिक विकास, और पांचवें, आजीविका के मुद्दों के लिए ग्राम सभा का सश्क्तीकरण करना।
MPRLP
वेबसाइट पर प्रदर्शित सामग्री, संधारण,
मध्यप्रदेश सोसायटी फॉर रूरल लाइवलीहुड प्रोमोशन द्वारा
आकल्पन, संधारण MPRLP